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JANJGIR-CHAMPA: शराबी दूल्हा मंजूर नहीं’ — दुल्हन मुस्कान ने लौटाई बारात, जिले में बनी साहस और आत्मसम्मान की मिसाल

यह घटना केवल एक बारात लौटने की कहानी नहीं है, बल्कि उस बदलते समाज की तस्वीर है जहां बेटियां अब चुप रहने के बजाय अपने भविष्य से जुड़े फैसले स्वयं लेने लगी हैं। मुस्कान की यह मुस्कान शायद कई अन्य बेटियों को भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस देगी।

जांजगीर-चांपा। जिले के ग्राम कोसमंदा में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो आने वाले समय में बेटियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। यहां विवाह मंडप तक पहुंची बारात को दुल्हन ने केवल इसलिए लौटा दिया क्योंकि, दूल्हा अत्यधिक शराब के नशे में था। समाज में अक्सर लड़कियों पर शादी हर हाल में निभाने का दबाव बनाया जाता है, लेकिन मुस्कान प्रधान ने अपने आत्मसम्मान और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए एक साहसिक निर्णय लिया।

जानकारी के अनुसार, चांपा के समीपस्थ ग्राम कोसमंदा निवासी मुस्कान प्रधान पिता स्वर्गीय तुलाराम प्रधान का विवाह जिला मुख्यालय जांजगीर के समीपस्थ ग्राम खोखरा निवासी संतकुमार राय, पिता मनहरण लाल राय, के साथ तय हुआ था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बारात धूमधाम से कोसमंदा पहुंची। परिवार और रिश्तेदार विवाह की तैयारियों में जुटे हुए थे तथा शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा था।

लेकिन, खुशियों के इस माहौल के बीच उस समय स्थिति बदल गई, जब दूल्हे की हालत पर लोगों की नजर पड़ी। बताया जाता है कि दूल्हे ने विवाह समारोह के दौरान अत्यधिक शराब का सेवन कर लिया था। नशे की वजह से उसका व्यवहार और स्थिति ऐसी थी कि दुल्हन पक्ष के लोगों में चिंता बढ़ गई। जब यह बात मुस्कान प्रधान तक पहुंची तो उन्होंने हिम्मत और समझदारी का परिचय देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह शराब के नशे में धुत व्यक्ति के साथ अपना जीवन नहीं बिताना चाहतीं।

परिवार और समाज के दबाव के बावजूद उन्होंने अपने निर्णय पर दृढ़ता दिखाई और विवाह से इंकार कर दिया। दुल्हन के इस फैसले के बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक चर्चा होती रही, लेकिन मुस्कान अपने निर्णय से नहीं डिगीं। अंततः बारात को बिना विवाह के ही वापस लौटना पड़ा।

आत्मसम्मान के आगे नहीं झुकी मुस्कान

ग्रामीणों के अनुसार, जिले में इस तरह का यह पहला मामला माना जा रहा है, जहां दुल्हन ने खुले तौर पर दूल्हे की शराबखोरी को आधार बनाकर शादी से इंकार कर दिया। मुस्कान का कहना था कि विवाह केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पूरे जीवन का साथ होता है। यदि शुरुआत ही नशे और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से हो रही है तो भविष्य की कल्पना करना कठिन है।

घटना ने दिया समाज के लिए बड़ा संदेश

यह घटना उन परिवारों और युवाओं के लिए भी एक संदेश है जो शादी जैसे पवित्र रिश्ते में नशे को सामान्य बात मान लेते हैं। शराब के कारण न केवल कई परिवार टूटते हैं, बल्कि घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक समस्याएं भी जन्म लेती हैं। मुस्कान प्रधान का निर्णय यह दर्शाता है कि आज की बेटियां शिक्षित, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि विवाह से बड़ा आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य होता है।

लोग कर रहे साहस की सराहना

इस घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र में मुस्कान के साहस की चर्चा हो रही है। कई लोगों ने उनके फैसले को सही बताते हुए कहा कि एक गलत रिश्ते में जीवनभर समझौता करने से बेहतर है कि शुरुआत में ही सही निर्णय लिया जाए। यह घटना केवल एक बारात लौटने की कहानी नहीं है, बल्कि उस बदलते समाज की तस्वीर है जहां बेटियां अब चुप रहने के बजाय अपने भविष्य से जुड़े फैसले स्वयं लेने लगी हैं। मुस्कान की यह मुस्कान शायद कई अन्य बेटियों को भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस देगी।

Rajendra Rathore

राजेंद्र राठौर विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार में पत्रकारिता का कोई पारंपरिक इतिहास नहीं रहा, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने वर्ष 2001 में दैनिक नवभारत में सर्वेयर के रूप में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2017 में उन्होंने दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह में कार्यभार संभाला और तब से वे आज पर्यंत “स्थानीय संपादक” के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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