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रोटी की तलाश में हरियाणा गए सक्ती के 40 मजदूर भट्ठे में फंसे, महिलाओं ने वीडियो जारी कर सुनाई आपबीती, पूरी मजदूरी नहीं मिलने और मारपीट की धमकी का आरोप; जिला प्रशासन से सुरक्षित वापसी की अपील

मजदूरों का कहना है कि बेहतर कमाई का सपना दिखाकर उन्हें हरियाणा लाया गया था, लेकिन यहां पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। उनका आरोप है कि उन्हें खराब परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। रहने के स्थान पर बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। महिलाओं और बच्चों को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

राजेंद्र राठौर@सक्ती। दो वक्त की रोटी और परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर हरियाणा गए सक्ती जिले के करीब 35 से 40 मजदूर आज खुद मदद की आस में जिला प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। जिले के परसाडीह, बाराद्वार और कारी भावर गांवों से रोजगार की तलाश में हरियाणा पहुंचे इन मजदूरों ने आरोप लगाया है कि वे हिसार जिले के हांसी थाना क्षेत्र स्थित सुल्तानपुर के एक ईंट भट्ठे में फंसे हुए हैं। उन्हें पूरी मजदूरी नहीं दी जा रही और घर लौटने की अनुमति भी नहीं मिल रही।

मजदूरों ने वीडियो संदेश जारी कर अपनी पीड़ा साझा की है। वीडियो में पुरुषों के साथ महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं। उनके चेहरों पर घर लौटने की बेबसी और चिंता साफ झलक रही है। महिलाओं का कहना है कि उनसे लगातार कड़ी मेहनत कराई जा रही है, लेकिन मेहनत के अनुरूप मजदूरी नहीं दी जा रही। जब वे अपने परिवार और सामान के साथ वापस गांव लौटने की बात करते हैं, तो ठेकेदार आधी मजदूरी देने की बात कहता है और विरोध करने पर मारपीट की धमकी देता है।

मजदूरों का कहना है कि बेहतर कमाई का सपना दिखाकर उन्हें हरियाणा लाया गया था, लेकिन यहां पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। उनका आरोप है कि उन्हें खराब परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। रहने के स्थान पर बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। महिलाओं और बच्चों को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़ितों ने स्थानीय श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद अधिकारी उनकी बात गंभीरता से नहीं सुन रहे और केवल भट्ठा संचालक या ठेकेदार का पक्ष लिया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि वे लगातार घर लौटने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली।

मामले में एक नई परेशानी तब सामने आई जब मजदूरों ने बताया कि हरियाणा में संबंधित अधिकारियों द्वारा उनसे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक इन दस्तावेजों की मांग से उनकी घर वापसी की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है।

ईधर, सक्ती जिले की श्रम अधिकारी मंजुलता कुर्रे ने कहा कि उन्हें इस मामले की पहले जानकारी नहीं थी। मीडिया के माध्यम से सूचना मिलने के बाद अब नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मजदूरों की स्थिति की जानकारी ली जाएगी।

इस पूरे मामले ने श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंधुआ मजदूरी उन्मूलन से जुड़े संगठन NCCEBL के संयोजक निर्मल गोराना का कहना है कि यदि किसी मजदूर को उसकी इच्छा के विरुद्ध रोका जा रहा है या मजदूरी के नाम पर बंधन में रखा जा रहा है, तो यह मामला बंधुआ मजदूरी कानून के दायरे में आ सकता है। ऐसे मामलों में प्रशासन को तत्काल जांच कर मजदूरों को राहत, सुरक्षित वापसी और पुनर्वास की कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि अपने गांव-घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर फंसे इन परिवारों की पुकार आखिर कब सुनी जाएगी। जिन हाथों ने दूसरों के आशियाने बनाने के लिए ईंटें ढोईं, वही हाथ आज अपने घर लौटने की उम्मीद में प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। मजदूरों की एक ही मांग है कि उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस लाया जाए और उनकी मेहनत की पूरी मजदूरी दिलाई जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपने परिवार के बीच लौट सकें।

Rajendra Rathore

राजेंद्र राठौर विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार में पत्रकारिता का कोई पारंपरिक इतिहास नहीं रहा, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने वर्ष 2001 में दैनिक नवभारत में सर्वेयर के रूप में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2017 में उन्होंने दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह में कार्यभार संभाला और तब से वे आज पर्यंत “स्थानीय संपादक” के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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