सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए ‘वन वुमन मिशन’: शिक्षिका दीप्ति सिंह राठौर ने 4 साल तक छुट्टियों-रातों में पढ़ाया, अब राष्ट्रीय परीक्षाओं में लगातार मिल रही सफलता
जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लॉक से एक प्रेरक कहानी: बिना फीस, बिना कोचिंग सेंटर, सिर्फ मोबाइल और समर्पण के दम पर बदल रही ग्रामीण बच्चों की तकदीर
राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा। जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों में हजारों रुपये की कोचिंग लेनी पड़ती है, वहीं जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड में एक सरकारी शिक्षिका पिछले चार वर्षों से अपने निजी समय में बच्चों को निःशुल्क ऑनलाइन पढ़ाकर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। यह कहानी सिर्फ एक शिक्षिका की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो साबित करती है कि यदि शिक्षक ठान ले तो संसाधनों की कमी भी प्रतिभाओं का रास्ता नहीं रोक सकती।

दरअसल, जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुकली में पदस्थ शिक्षिका दीप्ति सिंह राठौर ने विद्यालयीन जिम्मेदारियों के बाद बचने वाला समय ग्रामीण बच्चों के लिए समर्पित कर दिया। परिणाम यह है कि उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए छात्र-छात्राएं लगातार एनएमएमएस (NMMSE), श्रेष्ठा (SHRESHTA) और प्रयास जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में चयनित हो रहे हैं।

कोचिंग नहीं, मोबाइल बना सफलता का माध्यम
ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश बच्चों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना आसान नहीं होता। आर्थिक स्थिति, संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का अभाव अक्सर उनके सपनों के रास्ते में बाधा बनता है। ऐसे में दीप्ति सिंह राठौर ने ऑनलाइन माध्यम को हथियार बनाया और स्कूल समय के बाद बच्चों को अतिरिक्त कक्षाएं देना शुरू किया।
यह पहल धीरे-धीरे एक मिशन बन गई। सुकली, बनारी, पाली सहित कई गांवों के छात्र-छात्राएं इससे जुड़ते गए और सफलता के आंकड़े बढ़ते चले गए।
इस साल फिर मिला शानदार परिणाम
हाल ही में घोषित राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMSE) 2025-26 के परिणाम में सुकली स्कूल की तीन छात्राओं ने सफलता हासिल की।
- भूमिका लाठिया – 102 अंक
- माही दरवेश – 94 अंक
- योगेश्वरी दरवेश – 83 अंक
तीनों छात्राएं शिक्षिका की निःशुल्क ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ी थीं।
इसी सत्र में पाली स्कूल के छात्र मयंक सारवन का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित श्रेष्ठा परीक्षा के लिए हुआ है।
चार साल का रिकॉर्ड बना चर्चा का विषय
दीप्ति सिंह राठौर की ऑनलाइन कक्षाओं का प्रभाव किसी एक वर्ष तक सीमित नहीं रहा।
सत्र 2023-24
- तेजस कुमार रात्रे, गरिमा धीवर और उमेश धीवर का एनएमएमएस में चयन।
- तेजस कुमार रात्रे ने श्रेष्ठा और प्रयास परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की।
- पाली के छात्र हर्षवर्धन ने प्रथम प्रयास में एनएमएमएस और श्रेष्ठा जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सबको चौंका दिया।
सत्र 2024-25
- मधु धीवर, जागेश्वर बरेठ और आयुष सिदार का एनएमएमएस में चयन।
- रुद्राक्षी सिंह ने प्रयास परीक्षा में सफलता हासिल की।
सत्र 2025-26
- सुकली की तीन छात्राओं का एनएमएमएस में चयन।
- मयंक सारवन का श्रेष्ठा परीक्षा में चयन।
स्थानांतरण हुआ, लेकिन मिशन नहीं रुका
दिलचस्प बात यह है कि युक्तियुक्तकरण के दौरान उनका स्थानांतरण बनारी से सुकली हो गया, लेकिन बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला नहीं टूटा। नई शाला की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने पुराने विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन माध्यम से जोड़कर रखा।
यही वजह है कि अलग-अलग स्कूलों के बच्चे आज भी उनके मार्गदर्शन से लाभान्वित हो रहे हैं।
‘मेरी असली कमाई बच्चों की सफलता है’
शिक्षिका दीप्ति सिंह राठौर कहती हैं कि स्कूल के नियमित कार्यों के बाद जो समय बचता है, उसे वे बच्चों की तैयारी में लगाती हैं। उनके अनुसार जब किसी ग्रामीण परिवार का बच्चा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में चयनित होता है तो वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि और पुरस्कार होता है।
एक सवाल भी छोड़ रही यह सफलता
ग्रामीण क्षेत्र की एक शिक्षिका यदि अपने व्यक्तिगत प्रयास से लगातार राष्ट्रीय स्तर के परिणाम दे सकती हैं, तो क्या ऐसे नवाचारों को जिला और राज्य स्तर पर मॉडल के रूप में विकसित नहीं किया जाना चाहिए? शिक्षा जगत में यह सवाल अब चर्चा का विषय बन रहा है।
फिलहाल इतना तय है कि नवागढ़ क्षेत्र में शिक्षिका दीप्ति सिंह राठौर का यह ‘वन वुमन एजुकेशन मिशन’ अनेक बच्चों के सपनों को पंख दे रहा है और सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का संदेश भी।




