दहेज प्रताड़ना की शिकायत पर कार्रवाई को लेकर सक्ती पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
दो महीने बाद भी FIR और जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं होने का आरोप, पीड़िता ने SP से RTI के जरिए मांगा जवाब

जांजगीर-सक्ती। दहेज प्रताड़ना और शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न की शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने को लेकर सक्ती पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस अधीक्षक, जिला सक्ती को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन देकर पूछा है कि आखिर उसकी शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और मामले में FIR दर्ज हुई है या नहीं।

शिकायतकर्ता महिला द्वारा दिए गए आवेदन के मुताबिक, उसने 29 मई 2026 को थाना सक्ती में अपने पति संदीप तंबोली, निवासी ग्राम रसौटा, थाना पामगढ़ क्षेत्र तथा उसके परिजनों के खिलाफ शारीरिक, मानसिक और दहेज उत्पीड़न संबंधी शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत के बाद 27 जून 2026 को सक्ती परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों के बीच काउंसलिंग भी कराई गई।
काउंसलिंग के बाद थाने में बयान, फिर भी कार्रवाई की जानकारी नहीं
आवेदन में बताया गया है कि परिवार परामर्श केंद्र से संबंधित जानकारी सक्ती थाने को दिए जाने के बाद शिकायतकर्ता को थाने बुलाया गया, जहां सहायक उप निरीक्षक चित्रांगद चंद्रा द्वारा उसका बयान दर्ज किया गया। इसके बावजूद शिकायतकर्ता के अनुसार उसे प्रकरण में आगे हुई कार्रवाई अथवा जांच की प्रगति की जानकारी नहीं दी गई।
यही स्थिति अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। शिकायतकर्ता ने RTI के माध्यम से सीधे यह जानने की कोशिश की है कि शिकायत मिलने से लेकर अब तक पुलिस ने आखिर कौन-कौन से कदम उठाए हैं।
‘FIR हुई तो जानकारी क्यों नहीं दी?’
RTI आवेदन में शिकायतकर्ता ने पुलिस से स्पष्ट जवाब मांगा है कि—
• क्या इस मामले में FIR दर्ज की गई है या नहीं?
• यदि FIR दर्ज की गई है तो उसकी जानकारी शिकायतकर्ता को क्यों नहीं दी गई?
• यदि FIR दर्ज नहीं हुई है तो अब तक FIR दर्ज नहीं करने का कारण क्या है?
इन सवालों के जरिए शिकायतकर्ता ने पुलिस कार्रवाई की स्थिति को रिकॉर्ड पर लाने का प्रयास किया है।
शिकायत से RTI तक पहुंचा मामला
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि शिकायत के बाद परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलिंग, पुलिस थाने में बयान दर्ज होने और इसके बावजूद FIR तथा जांच की स्थिति को लेकर शिकायतकर्ता को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। हालांकि, पुलिस का लिखित में आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में पुलिस स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और FIR दर्ज नहीं होने की स्थिति में उसके पीछे क्या कारण हैं।
RTI से सामने आएगा पुलिस कार्रवाई का रिकॉर्ड
शिकायतकर्ता ने आवेदन के साथ 10 रुपये का राजस्व शुल्क जमा कर RTI के तहत जानकारी मांगी है। अब पुलिस विभाग से मिलने वाले जवाब से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शिकायत पर कौन-कौन सी कार्रवाई की गई, जांच किस स्तर पर है और FIR दर्ज करने अथवा नहीं करने के संबंध में पुलिस का आधिकारिक रुख क्या है।
थाना प्रभारी लखन पटेल का पक्ष: जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
सक्ती थाना प्रभारी लखन पटेल ने बताया कि मामले की जांच फिलहाल जारी है। शिकायतकर्ता महिला के पति एवं उनके ससुराल पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि अन्य गवाहों के बयान दर्ज किया जाना अभी बाकी है। चूंकि, मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी पक्षों और उपलब्ध तथ्यों की पूरी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। जांच में तथ्य सामने आने के बाद ही FIR दर्ज करना उचित होगा।




