नैला में इस बार दिखेगा अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर का अद्भुत स्वरूप, 150 फीट ऊंचा और 200 फीट चौड़ा होगा भव्य दुर्गा पंडाल
‘नैला की महारानी’ के दरबार में सजेगी 35 फीट ऊंची रत्नजड़ित मां दुर्गा की प्रतिमा, पश्चिम बंगाल के कारीगरों के साथ स्थानीय कलाकार गढ़ेंगे भव्यता की नई तस्वीर

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में अपनी भव्यता, विशाल पंडालों और हर साल बदलती अनूठी थीम के लिए अलग पहचान बना चुका नैला का दुर्गोत्सव 2026 इस बार भी श्रद्धालुओं को एक अद्भुत धार्मिक अनुभव देने की तैयारी में है। मां दुर्गा की आराधना के साथ कला, स्थापत्य और संस्कृति के अनूठे संगम के लिए प्रसिद्ध नैला में इस बार अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर की प्रतिकृति पर आधारित विशाल दुर्गा पंडाल तैयार किया जा रहा है।

श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव सेवा समिति, नैला की ओर से इस वर्ष पंडाल को करीब 150 फीट ऊंचा और 200 फीट चौड़ा आकार देने की तैयारी है। यानी नैला का यह दुर्गा पंडाल केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक ऐसा आकर्षण बनने जा रहा है, जहां उन्हें मंदिर वास्तुकला की भव्यता और मां दुर्गा की शक्ति का एक साथ दर्शन होगा।
अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर बनेगा पंडाल
नैला दुर्गोत्सव की सबसे बड़ी खासियत रही है कि समिति हर वर्ष किसी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल या स्थापत्य को अपनी थीम बनाकर उसे पंडाल के रूप में जीवंत करने का प्रयास करती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की प्रतिकृति को पंडाल का स्वरूप दिया जा रहा है।
विशाल शिखर, बारीक नक्काशी, आकर्षक प्रवेश द्वार और मंदिर स्थापत्य की अन्य विशेषताओं को पंडाल में उतारने की तैयारी है। पंडाल का प्रस्तावित 150 फीट ऊंचा और 200 फीट चौड़ा आकार ही इसकी विशालता का अंदाजा देने के लिए पर्याप्त है।
समिति का प्रयास है कि श्रद्धालु जब पंडाल में प्रवेश करें तो उन्हें महज एक सजावटी ढांचे का नहीं, बल्कि किसी भव्य मंदिर परिसर में पहुंचने जैसा आध्यात्मिक अनुभव हो।

35 फीट ऊंची ‘नैला की महारानी’ बनेगी आकर्षण का केंद्र
पंडाल की भव्यता के बीच मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र होगी। इस बार करीब 35 फीट ऊंची मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
प्रतिमा को विशेष रूप से आकर्षक बनाने के लिए सोने, मोती और रत्नों की कलात्मक सजावट की जाएगी। मां के श्रृंगार और प्रतिमा की भव्यता में ऐसी बारीकियों को शामिल करने की तैयारी है, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ शिल्प और कलात्मकता का भी अद्भुत अनुभव मिल सके।
यही वजह है कि नैला में मां दुर्गा को श्रद्धालुओं के बीच प्यार से ‘नैला की महारानी’ के नाम से भी पुकारा जाता है।

पश्चिम बंगाल के कारीगरों के साथ स्थानीय कलाकारों का हुनर
इस बार की एक खास बात यह भी है कि पंडाल निर्माण में पश्चिम बंगाल से आए अनुभवी कारीगरों के साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
पश्चिम बंगाल के कारीगर जहां पारंपरिक पंडाल निर्माण और सजावट की कला में माहिर हैं, वहीं स्थानीय कलाकार अपनी क्षेत्रीय कला, संस्कृति और भारतीय वास्तुकला की समझ को इस आयोजन में जोड़ेंगे।
आयोजन समिति का मानना है कि इससे केवल पंडाल की भव्यता ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच भी मिलेगा।
यह आयोजन इस मायने में भी महत्वपूर्ण होगा कि इसमें पारंपरिक कला को आधुनिक और भव्य प्रस्तुति के साथ जोड़ा जा रहा है।

अब जिले की सीमा से बाहर पहुंच चुका है नैला का दुर्गोत्सव
नैला का दुर्गोत्सव अब केवल स्थानीय श्रद्धालुओं का आयोजन नहीं रह गया है। हर वर्ष इसकी भव्यता देखने के लिए दूसरे जिलों और राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं।
आयोजन समिति के अनुसार महाराष्ट्र, ओडिशा, बिहार, झारखंड, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु नैला की दुर्गा पूजा और भव्य पंडाल देखने पहुंचते रहे हैं।
यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान नैला में धार्मिक उत्साह के साथ-साथ पर्यटन जैसा माहौल भी दिखाई देता है। विशाल पंडाल, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा, आकर्षक विद्युत सज्जा और दशहरा मेले का वातावरण शहर को एक अलग रंग में रंग देता है।
दुर्गोत्सव के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलता है सहारा
नैला का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण बन चुका है। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से छोटे दुकानदारों, फूल-माला विक्रेताओं, प्रसाद विक्रेताओं, खान-पान की दुकानों, अस्थायी बाजार और अन्य व्यवसायों को भी लाभ मिलता है।
इस लिहाज से नैला का दुर्गोत्सव केवल पूजा और पंडाल तक सीमित आयोजन नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बड़ा आयोजन बनता जा रहा है।

हर साल नई थीम, हर बार बढ़ती भव्यता
नैला दुर्गोत्सव की पहचान ही इसकी थीम आधारित भव्यता है। यहां हर वर्ष श्रद्धालुओं को कुछ नया देखने को मिलता है। देश-विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक स्थापत्य को पंडाल का स्वरूप देकर समिति ने इस आयोजन को प्रदेश के चर्चित दुर्गोत्सवों की कतार में खड़ा किया है।
अब वर्ष 2026 में अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर की प्रतिकृति के रूप में बनने वाला पंडाल इस परंपरा में एक और नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।
दशहरा मेले में उमड़ेगा आस्था और उत्सव का सैलाब
नैला की पहचान बन चुके दुर्गोत्सव में नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती है। मां दुर्गा के दर्शन के साथ विशाल पंडाल देखने और दशहरा मेले का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
इस बार 150 फीट ऊंचा और 200 फीट चौड़ा पंडाल, उसके भीतर विराजमान 35 फीट ऊंची रत्नजड़ित मां दुर्गा की प्रतिमा, पश्चिम बंगाल के कारीगरों की शिल्पकला और स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता—इन सबका संगम नैला दुर्गोत्सव को और भव्य बनाने वाला है।

एक नजर में नैला दुर्गोत्सव 2026
- आयोजक: श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव सेवा समिति, नैला
- पंडाल की थीम: अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर की प्रतिकृति
- पंडाल की ऊंचाई: लगभग 150 फीट
- पंडाल की चौड़ाई: लगभग 200 फीट
- मां दुर्गा की प्रतिमा: लगभग 35 फीट ऊंची
- विशेषता: रत्न, मोती और आकर्षक कलात्मक सजावट
- पंडाल निर्माण: पश्चिम बंगाल के कारीगरों के साथ स्थानीय कलाकार
- मुख्य आकर्षण: ‘नैला की महारानी’ का भव्य दरबार
- दर्शक: छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
- विशेष आयोजन: भव्य दशहरा मेला और धार्मिक-सांस्कृतिक वातावरण
खास बात
नैला का दुर्गोत्सव इस बार सिर्फ मां दुर्गा के दर्शन का अवसर नहीं होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की स्थापत्य शैली की भव्य झलक भी देखने को मिलेगी। 150 फीट ऊंचे पंडाल में 35 फीट की ‘नैला की महारानी’ की रत्नजड़ित प्रतिमा जब विराजमान होगी, तब नैला का यह दरबार निश्चित रूप से दुर्गोत्सव की भव्यता का नया पैमाना तय करता नजर आएगा।




