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Chhattisgarh के सरकारी स्कूल से IAS तक पहुंची श्रीमती जयश्री जैन की कहानी, 2005 में डिप्टी कलेक्टर से शुरू हुआ सफर अब सक्ती जिले की कमान तक

बिश्रामपुर की जिस बेटी ने सरकारी स्कूल से पढ़कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, उसने 2005 में प्रशासनिक सेवा में कदम रखा। वर्षों तक जिम्मेदारियां निभाईं, राज्य सेवा से IAS तक पहुंचीं और अब सक्ती जिले की कलेक्टर बनी हैं। उनकी कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू यही है कि इसमें बड़े शहर से निकलकर बड़े पद तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि एक छोटे शहर की मेधावी बेटी के लगातार आगे बढ़ते जाने की कहानी है। आज उनके सामने सक्ती जिला है। एक नया जिला, नई चुनौतियां और नई उम्मीदें। अब बिश्रामपुर की बेटी की अगली पारी सक्ती के प्रशासनिक इतिहास में किस तरह दर्ज होती है—इस पर पूरे जिले की नजर रहेगी।

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-सक्ती। किसी सरकारी स्कूल की कक्षा से शुरू हुआ सफर जब एक पूरे जिले की प्रशासनिक कमान तक पहुंचता है, तो वह सिर्फ एक अधिकारी की नियुक्ति नहीं रह जाती बल्कि, वह कहानी बन जाती है मेहनत की, शिक्षा की और उस विश्वास की कि छोटे शहर से निकलकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार के 18 अगस्त 2026 के बड़े प्रशासनिक फेरबदल में IAS श्रीमती जयश्री जैन को सक्ती जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। उनके साथ छह जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं और राज्य के प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव किया गया है। लेकिन सक्ती की नई कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन के नाम के साथ जुड़ी कहानी इस नियुक्ति से कहीं ज्यादा दिलचस्प है।

एक तरफ छत्तीसगढ़ का बिश्रामपुर- जहां उनकी शिक्षा की नींव पड़ी, दूसरी तरफ राजस्थान का गंगाशहर- जहां उनका पारिवारिक रिश्ता जुड़ा। और इन दोनों के बीच से निकलती है प्रशासनिक सेवा की वह यात्रा, जो 2005 में राज्य प्रशासनिक सेवा से शुरू होकर IAS और अब सक्ती जिला के कलेक्टर की जिम्मेदारी तक पहुंची है।

🔵सरकारी स्कूल से प्रशासन की शीर्ष पंक्ति तक

श्रीमती जयश्री जैन की कहानी की शुरुआत किसी बड़े महानगर के महंगे स्कूल से नहीं हुई। जानकारी के अनुसार, उनकी स्कूली शिक्षा बिश्रामपुर के सरकारी स्कूल में हुई। आगे उन्होंने होली क्रॉस कॉलेज, अंबिकापुर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज के दौरान उनकी मेधा का परिचय मिला और उन्हें B.Sc. में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल करने वाली छात्रा बताया गया है। यही वह दौर था जब पढ़ाई उनके लिए सिर्फ डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं थी, बल्कि आगे बढ़ने का रास्ता बन रही थी। आज जब वे सक्ती जिले की कलेक्टर बनने जा रही हैं, तब बिश्रामपुर के उन दिनों को याद करना स्वाभाविक है- एक सामान्य परिवार की मेधावी बेटी, सरकारी स्कूल की पढ़ाई और फिर प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ता कदम।

🔴 वर्ष 2005 में शुरू हुआ प्रशासनिक सफर

श्रीमती जयश्री जैन ने वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की। बाद में राज्य सेवा में लंबे अनुभव के बाद उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति मिली। यानी श्रीमती जयश्री जैन का सफर उस रास्ते का उदाहरण है, जिसमें अधिकारी पहले राज्य प्रशासन की जमीनी जिम्मेदारियां संभालता है, अनुभव अर्जित करता है और फिर उसी अनुभव के आधार पर IAS कैडर तक पहुंचता है। और यहीं से कहानी और रोचक हो जाती है… आज उनके नाम के आगे IAS लिखा है, लेकिन इस पद तक पहुंचने के पीछे एक लंबा प्रशासनिक अनुभव है।

🟠 प्रशासन की कई परतों को करीब से देखा

जिला प्रशासन से लेकर राज्य मुख्यालय तक अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने के दौरान श्रीमती जयश्री जैन ने प्रशासन की कई परतों को करीब से देखा। उनके शुरुआती प्रशासनिक अनुभव में जिला कोरिया, रायपुर में अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM), नजूल अधिकारी और उप जिला निर्वाचन अधिकारी जैसे दायित्व शामिल रहे। इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में भी काम किया।

🟡 IAS बनीं तो दो शहरों में छाया खुशी का माहौल

जनवरी 2021 में जब श्रीमती जयश्री जैन को IAS में पदोन्नति मिली, तो यह खबर केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही। बिश्रामपुर और राजस्थान के गंगाशहर, दोनों जगह इस उपलब्धि को गौरव के रूप में देखा गया। गंगाशहर से प्रकाशित एक विस्तृत प्रोफाइल में उन्हें “गंगाशहर की बेटी और बहू” के रूप में संबोधित करते हुए उनकी IAS पदोन्नति पर खुशी व्यक्त की गई थी। उसी रिपोर्ट में उन्हें बिश्रामपुर की बेटी और गंगाशहर से जुड़े मालू-भूरा परिवारों की बेटी-बहू बताया गया था। यही वजह है कि श्रीमती जयश्री जैन की पहचान सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है। उनके साथ बिश्रामपुर की बेटी का भावनात्मक रिश्ता है तो राजस्थान के गंगाशहर की बेटी-बहू होने का सामाजिक जुड़ाव भी है।

🟢 मंत्रालय से मैदान तक- अब सक्ती की बारी

हाल के वर्षों में श्रीमती जयश्री जैन ने राज्य शासन के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां संभाली हैं। 2021 में उन्हें बिलासपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया था। उस समय वे मुख्य सचिव कार्यालय में उप सचिव की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इसके बाद प्रशासनिक अनुभव का दायरा और बढ़ा। 2025 के छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक जनसंपर्क रिकॉर्ड में उन्हें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रबंध संचालक के रूप में भी उल्लेखित किया गया है। यानी उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन, निर्वाचन, मंत्रालय, ग्रामीण आजीविका और शासन के विभिन्न विभागों का अनुभव शामिल रहा है। अब इसी अनुभव की सबसे बड़ी परीक्षा सक्ती में होने वाली है।

🟣 सक्ती के सामने नई कलेक्टर की पहली बड़ी चुनौती

सक्ती एक ऐसा जिला है, जहां प्रशासन के सामने विकास और बुनियादी सुविधाओं से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की चुनौती है। नई कलेक्टर के सामने संभावित प्राथमिकताओं में, जनशिकायतों का त्वरित समाधान, राजस्व मामलों का निराकरण, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, सड़क-पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं, महिला एवं बाल विकास तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना प्रमुख विषय हो सकते हैं। हालांकि, उनकी प्राथमिकताएं पदभार ग्रहण करने के बाद ही आधिकारिक रूप से स्पष्ट होंगी। लेकिन एक बात तय है कि उनके पास जिला प्रशासन का अनुभव लेने के साथ-साथ राज्य मुख्यालय और विभिन्न विभागों में काम करने का अनुभव भी है।

🟤 बिश्रामपुर से सक्ती तक- एक भावनात्मक कड़ी

श्रीमती जयश्री जैन की नई जिम्मेदारी का सबसे भावुक पक्ष शायद बिश्रामपुर से जुड़ा है। जिस छत्तीसगढ़ में उन्होंने शिक्षा पाई, उसी राज्य में प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और अब उसी राज्य के एक जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। यह यात्रा एक तरह से “अपनी जमीन से निकलकर उसी जमीन पर लौटने” जैसी है, फर्क सिर्फ इतना है कि तब वे सरकारी स्कूल की छात्रा थीं और आज उसी प्रदेश के एक जिले की कलेक्टर हैं।

🔵 उपलब्धियों के पीछे अनुशासन और सादगी

2021 की प्रोफाइल में श्रीमती जयश्री जैन के व्यक्तित्व को लेकर प्रकाशित बातचीत में उन्हें शालीन, सुसंस्कारित और स्पष्ट सोच वाली महिला बताया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें साहित्य पढ़ने में भी रुचि रही है और आचार्य महाप्रज्ञ के साहित्य का अध्ययन करने का उल्लेख किया गया था। यह विवरण उनके सार्वजनिक प्रशासनिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है, लेकिन इससे उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष सामने आता है जो आमतौर पर सरकारी पदनाम और तबादला आदेशों के पीछे छिप जाता है।

🔴 अब सक्ती की निगाहें नई कलेक्टर पर

18 अगस्त 2026 का आदेश आते ही श्रीमती जयश्री जैन का नाम अचानक सक्ती की प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गया। लेकिन उनके लिए यह केवल एक नई पोस्टिंग नहीं है। यह वर्षों की प्रशासनिक यात्रा के बाद पहली बार एक जिले की समग्र कमान संभालने की बड़ी जिम्मेदारी है। सक्ती की जनता अब यह देखना चाहेगी कि मंत्रालय और विभिन्न विभागों में अर्जित उनका अनुभव जिले की जमीन पर किस रूप में दिखाई देता है। क्या जनसुनवाई और शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की मॉनिटरिंग मजबूत होगी? क्या महिला स्व-सहायता समूहों और आजीविका गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा? क्या राजस्व मामलों के निराकरण में तेजी आएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में उनकी कार्यशैली से मिलेंगे।

एक नजर में श्रीमती जयश्री जैन (IAS)

🔴 नाम: श्रीमती जयश्री जैन
🔵 सेवा: भारतीय प्रशासनिक सेवा
🟤 कैडर: छत्तीसगढ़
🟣 बैच: 2016
🟢 IAS में चयन का स्रोत: राज्य सिविल सेवा से पदोन्नति
🟡 राज्य प्रशासनिक सेवा: 2005 से
🟠 स्कूली शिक्षा: बिश्रामपुर
🔴 उच्च शिक्षा: होली क्रॉस कॉलेज, अंबिकापुर
🔵 प्रशासनिक अनुभव: जिला प्रशासन, निर्वाचन, मंत्रालय सहित विभिन्न जिम्मेदारियां
🟤 पूर्व दायित्वों में: अपर कलेक्टर बिलासपुर सहित विभिन्न पद
🟣 ग्रामीण आजीविका: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी जिम्मेदारी
🟢 नई जिम्मेदारी: कलेक्टर, सक्ती
🟡 पारिवारिक जुड़ाव: बिश्रामपुर (छत्तीसगढ़) और गंगाशहर (राजस्थान)

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