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जेल की सलाखों के पीछे क्या हुआ? दुष्कर्म मामले के आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, बाथरूम में फंदे से लटका मिला शव

एक दिन पहले ही भेजा गया था जिला जेल, अगले ही दिन मिली मौत की खबर; कई सवालों के जवाब तलाश रही जांच

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। जिला जेल खोखरा की ऊंची दीवारों के भीतर मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विचाराधीन बंदी का शव जेल के बाथरूम में फंदे से लटका मिला। मृतक दुवास केवट को नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में गिरफ्तार कर महज एक दिन पहले ही न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। लेकिन जेल पहुंचने के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि उसकी मौत की खबर सामने आ गई।

घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जेल के भीतर ऐसा क्या हुआ कि आरोपी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया? क्या वह मानसिक दबाव में था, या इसके पीछे कोई और वजह है? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं।

जानकारी के अनुसार, बलौदा थाना क्षेत्र में दर्ज नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म मामले में आरोपी दुवास केवट को सोमवार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था। न्यायालय से उसे जिला जेल खोखरा भेजा गया। मंगलवार को जेल परिसर के बाथरूम में उसका शव कपड़े के फंदे से लटका मिला।

जेल प्रशासन द्वारा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है, लेकिन मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।

बताया जाता है कि 5 मार्च 2026 को एक नाबालिग बालिका घर से लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर बलौदा थाना में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और साइबर ट्रैकिंग की मदद से बालिका को कोरबा जिले से बरामद किया था। जांच के दौरान दुवास केवट को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेल में दाखिल होने के कुछ ही घंटों बाद आरोपी की मौत कैसे हो गई? क्या जेल प्रशासन को किसी प्रकार के मानसिक तनाव या आत्मघाती प्रवृत्ति की जानकारी थी? क्या निगरानी व्यवस्था में कोई चूक हुई? या फिर यह महज एक दुखद आत्महत्या का मामला है?

फिलहाल, पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जेल के सीसीटीवी फुटेज, बंदियों और जेल कर्मचारियों के बयान इस रहस्य से पर्दा उठाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। तब तक जिला जेल की यह मौत कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है।

Rajendra Rathore

राजेंद्र राठौर विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार में पत्रकारिता का कोई पारंपरिक इतिहास नहीं रहा, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने वर्ष 2001 में दैनिक नवभारत में सर्वेयर के रूप में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2017 में उन्होंने दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह में कार्यभार संभाला और तब से वे आज पर्यंत “स्थानीय संपादक” के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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