रेत माफियाओं के खिलाफ विधायक ब्यास कश्यप का धरना: कार्रवाई से ज्यादा चर्चा में आया ‘राजनीतिक संरक्षण’ का खुला खेल
केवा-नवापारा इलाके में ग्रामीण महिलाओं की शिकायत के बाद सड़क पर उतरे विधायक, कार्रवाई के दौरान बीजेपी नेता का बयान बना नया विवाद

NKD@जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध रेत खनन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ अवैध उत्खनन की नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संरक्षण की है, जिसकी चर्चा लंबे समय से दबे स्वर में होती रही है। जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के केवा-नवापारा इलाके में ग्रामीण महिलाओं की शिकायत पर पहुंचे जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने जब मौके पर ही धरना शुरू कर दिया, तब प्रशासन को रात में कार्रवाई के लिए मैदान में उतरना पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि हसदेव और महानदी के विभिन्न घाटों से दिन-रात बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन हो रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कें जर्जर हो रही हैं, जबकि विरोध करने वालों को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
महिलाओं ने विधायक के सामने अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की। इसके बाद विधायक ने राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और स्वयं सड़क पर धरने पर बैठ गए। विधायक के धरने की खबर फैलते ही कथित तौर पर रेत कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया और कई वाहन एवं मशीनें मौके से हटा ली गईं। जिला टास्क फोर्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर पांच हाईवा वाहनों को जब्त कर सील करने की कार्रवाई की।
कार्रवाई के बीच सामने आया बड़ा सवाल
घटना का सबसे चर्चित पहलू तब सामने आया, जब कार्रवाई के दौरान मौजूद एक भाजपा नेता ने अधिकारियों के सामने ही कथित तौर पर रेत कारोबार से जुड़े अपने संबंधों का जिक्र करते हुए चुनौतीपूर्ण अंदाज में बयान दिया। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता ने दावा किया कि बड़ी मात्रा में रेत डंप कर रखी गई है और यदि प्रशासन में हिम्मत है तो कार्रवाई कर दिखाए।
यही बयान अब पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक बिंदु बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की रेत कारोबार में संलिप्तता है तो आखिर प्रशासन अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया।
धरने ने खोल दी प्रशासनिक सक्रियता की पोल?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस अवैध कारोबार की शिकायत महीनों से की जा रही थी, उस पर कार्रवाई तब हुई, जब विधायक खुद सड़क पर बैठ गए। इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या प्रशासन को कार्रवाई के लिए जनप्रतिनिधियों के धरने का इंतजार करना पड़ता है?
तहसीलदार ने कार्रवाई को नियमित अभियान का हिस्सा बताया है और जब्त वाहनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई तथा एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही है।
रात 9 बजे खत्म हुआ धरना, लेकिन बहस जारी
करीब रात 9 बजे तक चले धरने के बाद विधायक ने कार्रवाई होने पर आंदोलन समाप्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने खनिज विभाग और प्रशासनिक तंत्र पर रेत माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए।
घटना के बाद जिले में अब चर्चा सिर्फ पांच हाईवा की जब्ती की नहीं, बल्कि उस कथित राजनीतिक और प्रशासनिक गठजोड़ की हो रही है, जिसके कारण अवैध रेत कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा है।




