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Janjgir-Champa: एक आदेश में मूल संस्था लौटने के निर्देश, दूसरे में मनपसंद संलग्नीकरण बरकरार… आखिर किस नियम से चल रहा शिक्षा विभाग?

DEO ने 7 अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल मूल संस्था भेजा, लेकिन वर्षों से कार्यालय और मनचाहे स्थानों पर जमे संलग्न शिक्षक-कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई नहीं, विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

रायपुर। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय जांजगीर द्वारा हाल ही में जारी आदेश में संलग्नीकरण पर कार्यरत सात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल उनकी मूल संस्था में लौटने और कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि सभी संबंधित कर्मचारी VSK App और आधार आधारित उपस्थिति दर्ज कराएं, अन्यथा वेतन भुगतान नहीं होगा। लेकिन इसी आदेश ने जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि एक ओर सात कर्मचारियों को नियमों का हवाला देकर मूल संस्था में भेजा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और मनचाहे स्थानों पर संलग्न दर्जनों शिक्षक एवं कर्मचारी अब भी नियमों को ताक पर रखकर कार्य कर रहे हैं। आखिर इन पर विभाग की सख्ती क्यों नहीं दिखाई दे रही, यह बड़ा सवाल बन गया है।

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स्थानीय आदेश से व्याख्याता को बना दिया गया BRC

जानकारी के अनुसार, नवागढ़ विकासखंड के अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल नैला-भाटापारा में पदस्थ एक व्याख्याता को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्थानीय स्तर पर आदेश जारी कर बलौदा विकासखंड का BRC (विकासखंड परियोजना समन्वयक ) बना दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब शिक्षा विभाग संलग्नीकरण समाप्त कर कर्मचारियों को मूल संस्था भेजने की बात कर रहा है, तब यह व्यवस्था किस नियम के तहत जारी है?

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DEO कार्यालय में वर्षों से जमे शिक्षक-कर्मचारी

सूत्रों के अनुसार, आत्मानंद स्कूल जांजगीर में पदस्थ एक व्याख्याता कई महीनों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर में संलग्न हैं। वहीं हायर सेकेंडरी स्कूल धुरकोट (नवागढ़) के एक व्याख्याता से भी DEO कार्यालय में कार्य लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, शासकीय हाई स्कूल कुलीपोटा (बलौदा) के एक लिपिक (क्लर्क) को भी वर्षों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न रखा गया है।

बताया जाता है कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में भी कई शिक्षक एवं कर्मचारी लंबे समय से अपनी सुविधा के अनुरूप स्थानों पर संलग्न हैं। इन संलग्नीकरणों को लेकर समय-समय पर शिकायतें और आपत्तियां भी उठती रही हैं, लेकिन इनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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क्या नियम सिर्फ कुछ लोगों के लिए?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शासन के निर्देशों के पालन में संलग्नीकरण कर्मचारियों को तत्काल मूल संस्था भेजा जा सकता है, तो वर्षों से संलग्न कर्मचारियों पर वही नियम क्यों लागू नहीं किए जा रहे? क्या विभाग अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम अपना रहा है?

दोहरे मापदंड के आरोप

शिक्षा विभाग की इस कार्यशैली को लेकर अब दोहरे मापदंड के आरोप लगने लगे हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि शासन के आदेश का पालन करना है तो सभी संलग्नीकरणों की निष्पक्ष समीक्षा कर नियम विरुद्ध संलग्न कर्मचारियों को भी तत्काल उनकी मूल संस्था में भेजा जाना चाहिए। केवल चुनिंदा मामलों में कार्रवाई से विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग

अब मांग उठ रही है कि जिले में वर्षों से चल रहे सभी संलग्नीकरणों की सूची सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किस नियम और किस आदेश के तहत संबंधित शिक्षक एवं कर्मचारियों को मूल पदस्थापना से अलग रखकर कार्य कराया जा रहा है। यदि शासन के निर्देशों का समान रूप से पालन नहीं किया गया तो यह मामला उच्च स्तर तक पहुंच सकता है।

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