दिव्यांग पीड़िता को मिला न्याय : छेड़छाड़ और जानलेवा हमले के दोषियों को पांच-पांच साल की सजा
तीन आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में ठहराया गया दोषी, पीड़िता के साहस और कानूनी लड़ाई की क्षेत्र में हो रही सराहना

जांजगीर-चांपा। दिव्यांग महिला के साथ घर में घुसकर छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने वाले आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम) ने मामले में दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। मामला वर्ष 2022 का है।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने घर के बरामदे में सब्जी काट रही थी, तभी आरोपी पीछे के रास्ते से घर में घुस आए। आरोपियों ने पीड़िता के साथ जबरदस्ती करते हुए छेड़छाड़ की और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोपियों ने चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के दौरान पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी गई।
बताया गया कि आरोपियों ने पीड़िता पर समझौते का दबाव भी बनाया, लेकिन पीड़िता ने साहस दिखाते हुए मामले की शिकायत पुलिस चौकी फगुरम, थाना डभरा में दर्ज कराई। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और साक्ष्यों के माध्यम से आरोपियों के अपराध को साबित किया।
न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपियों विनय राठौर पिता सामाजिक लाल राठौर, सामाजिक लाल राठौर पिता नारायण प्रसाद राठौर एवं सतीश उर्फ खगेंद्र पिता खेमचंद राठौर निवासी ग्राम सपिया थाना डभरा को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दोषी ठहराया।
न्यायालय के फैसले को दिव्यांग महिला के साहस और न्याय व्यवस्था पर भरोसे की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कठोर सजा समाज में गलत मानसिकता रखने वालों के लिए कड़ा संदेश है।




