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भाषण खत्म… शिविर खत्म! ग्राम परसाही नाला में सुशासन तिहार बना महज दिखावा

स्टॉल बंद होने की बात कहकर ग्रामीणों को लौटाया गया, कई विभागों के अधिकारी रहे नदारद, प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जिले में आयोजित किए जा रहे “सुशासन तिहार” को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। अकलतरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत परसाही (नाला) में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर प्रशासनिक अव्यवस्था और खानापूर्ति का उदाहरण बनकर सामने आया। एक ओर प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शिविर को सफल बताते हुए जनता को योजनाओं से लाभान्वित करने का दावा किया, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने पूरे आयोजन की वास्तविकता उजागर कर दी।

जानकारी के अनुसार, पूर्व माध्यमिक शाला परसाही में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे। प्रशासन का दावा है कि इस शिविर में कुल 561 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 540 मांग और 21 शिकायत से संबंधित थे। साथ ही हितग्राहियों को सामग्री एवं चेक वितरण, योजनाओं की जानकारी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मंचीय कार्यक्रम और नेताओं के भाषण समाप्त होते ही शिविर की असल तस्वीर सामने आ गई। कई विभागों के कर्मचारी स्टॉलों से बैनर-पोस्टर समेटकर निकलने लगे और दोपहर लगभग 2 बजे ही शिविर समापन की घोषणा कर दी गई। गांव-गांव से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे कई लोगों को यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि “अब आवेदन नहीं लिए जाएंगे, स्टॉल बंद हो चुके हैं।”

ग्रामीणों का कहना है कि जब शासन ने सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा किया है, तो फिर निर्धारित समय से पहले शिविर बंद करने का क्या औचित्य था? लोगों ने आरोप लगाया कि पूरे आयोजन में जनता की समस्याओं से ज्यादा फोटो सेशन और सरकारी औपचारिकताओं पर ध्यान दिया गया।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि शिविर में कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर दिखाई ही नहीं दिए। जिन विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, वहां भी कर्मचारियों की सक्रियता नाम मात्र की रही। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम को भी सिर्फ कागजी सफलता दिखाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जनता की समस्याएं सुनी ही नहीं जानी थीं और आवेदन लेने से पहले ही स्टॉल बंद कर दिए जाने थे, तो फिर इस प्रकार के शिविर आयोजित करने का क्या मतलब रह जाता है?

शिविर में जिला पंचायत सदस्य महादेव नेताम, जनपद पंचायत अकलतरा अध्यक्ष शकुन देव अघरिया, जनपद सदस्यगण एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। लेकिन, अब परसाही (नाला) का यह शिविर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़े अंतर को उजागर करता नजर आ रहा है।

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