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अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली के लिए महिलाओं ने की विशेष तैयारी, मंदिरों और वट वृक्षों के पास होगी पूजा-अर्चना

सुहाग और समृद्धि का प्रतीक वट सावित्री व्रत कल

जांजगीर-चांपा। हिंदू धर्म में महिलाओं के प्रमुख व्रतों में शामिल वट सावित्री व्रत इस वर्ष शनिवार 16 मई को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

सुबह से ही महिलाओं में व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलेगा। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना करेंगी और विधि-विधान से पूजा कर कथा श्रवण करेंगी। पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष की सात या 108 बार परिक्रमा कर धागा लपेटेंगी तथा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि की कामना करेंगी।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि माता सावित्री ने अपने तप, निष्ठा और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

पूजा सामग्री की दुकानों में भी सुबह से चहल-पहल बनी रही। महिलाएं पूजा के लिए फल, फूल, रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप, कच्चा सूत, भीगा चना, गुड़ और अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी करती नजर आईं। कई स्थानों पर महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से वट वृक्ष के पास बैठकर कथा सुनने और भजन-कीर्तन करने की भी तैयारी की गई है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार वट सावित्री व्रत पर कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

मान्यता है कि वट सावित्री व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। महिलाओं ने इस पर्व को लेकर घरों में विशेष तैयारी की है और मंदिरों में भी पूजा-अर्चना को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है।

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