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वायरल ऑडियो कांड के बाद बढ़ा विरोध: वर्षों से एक ही जिले में जमे कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह पर उठे सवाल

इंजीनियर से एसडीओ और अब ईई तक का सफर, व्यवहार को लेकर लगातार होती रही चर्चाएं, लोगों और विभागीय कर्मचारियों में कड़ी कार्रवाई की मांग तेज

राजेंद्र राठौर @ जांजगीर-चांपा। सोशल मीडिया में वायरल हुए कथित ऑडियो मामले के बाद जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा और अभद्र व्यवहार सामने आने के बाद अब विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारी के लंबे समय से जिले में पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारी पिछले कई वर्षों से जिले में पदस्थ हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि उन्होंने इंजीनियर पद से अपने कार्यकाल की शुरुआत की थी और बाद में पदोन्नति पाते हुए एसडीओ तथा अब कार्यपालन अभियंता (ईई) के पद तक का सफर तय किया। लंबे समय से जिले में जमे रहने के कारण विभाग के अंदर और बाहर उनकी कार्यशैली को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं।

विभागीय कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम रही है कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार कई बार विवादों में रहा है। कर्मचारियों से बातचीत का तरीका, कार्यालयीन कार्यप्रणाली और कथित अभद्र व्यवहार को लेकर पहले भी असंतोष सामने आता रहा है। हालांकि, अधिकांश मामलों में शिकायतें खुलकर सामने नहीं आ सकीं, लेकिन विभागीय गलियारों में इस तरह की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं।

वायरल ऑडियो सामने आने के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया। सोशल मीडिया में ऑडियो वायरल होने के बाद जिलेभर में इसकी चर्चा शुरू हो गई। लोगों ने सवाल उठाए कि यदि जांच में ऑडियो सही पाया जाता है तो यह केवल व्यक्तिगत व्यवहार का मामला नहीं बल्कि, शासकीय गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जांच के निर्देश दिए थे। अपर कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने के लिए सचिव, जलसंसाधन विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की निगाहें विभागीय स्तर पर होने वाले अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

इधर, जिले के कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग उठानी शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि शासकीय पद पर बैठे अधिकारियों का आचरण मर्यादित और जिम्मेदार होना चाहिए। यदि किसी अधिकारी पर लगातार दुर्व्यवहार और अभद्रता के आरोप लगते रहे हैं तो ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाना जरूरी है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन बना रहे।

विभागीय हलकों में भी चर्चा तेज

वायरल ऑडियो और जांच कार्रवाई के बाद जलसंसाधन विभाग के भीतर भी माहौल गरमाया हुआ है। कर्मचारी खुलकर भले कुछ न कह रहे हों, लेकिन अंदरखाने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। कई लोगों का मानना है कि इस मामले ने विभागीय कार्यसंस्कृति और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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