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Battery Technology India Norway: नॉर्वे में छह महीने दिन और छह महीने रात, वहां क्यों जा रहे हैं पीएम मोदी

PM Modi 18th May Visit Norway: पीएम नरेंद्र मोदी इसी महीने 18 मई को यूरोप के बेहद ठंडे देश नॉर्वे जा रहे हैं। एनर्जी संकट के बीच पीएम मोदी ऐसे देश क्यों जा रहे हैं, जहां कई हफ्तों तक सूरज नहीं निकलता है। जानतें हैं वजह।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप के दौरे के वक्त नॉर्वे जाएंगे। 18-19 मई की नॉर्वे की यात्रा के दौरान वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी की यह पहली नॉर्वे यात्रा होने जा रही है, जो पिछले 43 वर्षों में भारत के किसी प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक नॉर्वे यात्रा होगी। यह वही नॉर्वे है, जहां के कुछ हिस्से में छह महीने का दिन और छह महीने की रात होती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर पीएम मोदी नॉर्वे क्यों जा रहे हैं?

नॉर्वे: 6 महीने आधी रात वाले देश क्यों जा रहे मोदी

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे की आगामी यात्रा के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने पीएम मोदी की दौरे की वजह भी बताई। उन्होंने कहा-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर 18 मई, 2026 को मुलाकात करेंगे। दोनों भारत-नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें भारत के मुक्त व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (FTA) को लागू करने के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर भी चर्चा होनी है, जिसमें कार्बन कैप्चर और स्टोरेज, अपतटीय पवन ऊर्जा, बैटरी प्रौद्योगिकी, ऊर्जा दक्षता आदि में सहयोग शामिल है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के इस दौरे से व्यापार और निवेश, नवाचार, स्वच्छ और ग्रीन टेक्नोलॉजी, ब्लू इकनॉमी और अत्याधुनिक प्रगति के क्षेत्रों में सहयोग के एक महत्वाकांक्षी एजेंडे को आकार देने और विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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नॉर्वे में आधी रात को निकलता है सूरज

नॉर्वे दरअसल आर्कटिक सर्किल के पास पड़ता है। इस वजह से नॉर्वे के स्वालबॉर्ड जैसे सबसे उत्तरी इलाकों में 6 महीने तक रात रहती है। कुछ जगहों पर यह 76 दिनों से लेकर 99 दिनों तक रात रहती है। सूरज निकलता ही नहीं है। इस पीरियड को पोलर नाइट कहा जाता है।

नॉर्वे में 6 महीने दिन 6 महीने की रात क्यों होती है

  • एलिक्स प्रेस पर छपी एक स्टोरी के अनुसार, नॉर्वे में लगातार अंधेरे की इस अवधि को ध्रुवीय रात्रि के नाम से जाना जाता है। यह घटना पृथ्वी के अपनी धुरी पर झुकने और सूर्य के सापेक्ष उसकी स्थिति के कारण होती है। जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, उसके अक्षीय झुकाव के कारण ग्रह के कई हिस्सों को पूरे साल सूर्य के प्रकाश की अलग-अलग मात्रा प्राप्त होती है।
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में, इस झुकाव के परिणामस्वरूप सर्दियों के दौरान लंबे समय तक अंधेरा और गर्मियों के दौरान लगातार दिन का उजाला रहता है। छह महीने की यह रात केवल नॉर्वे में ही नहीं होती है। यह अलास्का, कनाडा और रूस के कुछ हिस्सों जैसे हाई आल्टीट्यूड वाले इलाकों में भी होती है।

नॉर्वे की मनमोहक रात देखने दुनियाभर से आते हैं सैलानी

हालांकि, नॉर्वे अपने मनमोहक नजारों के लिए मशहूर है। यहां के लोग लंबे समय तक अंधेरे में रहने के हिसाब से ढल चुके हैं। यहां की ध्रुवीय रात्रि एक प्राकृतिक चमत्कार है जो दुनिया भर के वैज्ञानिकों, फोटोग्राफरों और सैलानियों को आकर्षित करता है जो वर्ष के इस समय के अद्वितीय वातावरण और सुंदरता का अनुभव करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

नॉर्वे में रहते हैं करीब 25 हजार भारतीय

  • नॉर्वे यूरोप महाद्वीप में स्थित एक छोटा सा देश है। इसकी राजधानी ओस्लो है। नार्वे का कुल क्षेत्रफल 3,85,252 वर्ग किलोमीटर है।
  • नॉर्वे की आबादी मई, 2026 तक करीब 56.6 लाख है। नॉर्वेजियन भाषा इसकी मुख्य और राजभाषा है। इसके क्षेत्राधिकार् में स्कैडीनेवियाई देश है। जिसमें पहाड़, ग्लेशियर और गहरे तटीय क्षेत्र शामिल है।
  • नॉर्वे में करीब 25 हजार भारतीय रहते हैं। यह यूरोप में न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले देशों में दूसरे नंबर पर है।
  • यह उत्तरी यूरोप का एक संवैधानिक राजतंत्र है, जो अपनी उच्च जीवन प्रत्याशा (82.5 वर्ष से अधिक), मजबूत अर्थव्यवस्था और 3.97% की कम बेरोजगारी दर के लिए जाना जाता है।

नॉर्वे में रात के छह महीने रोजाना की लाइफ को कैसे प्रभावित करते हैं?

  • नॉर्वे में रात के छह महीने देश के उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के दैनिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। इस दौरान, सूर्य के प्रकाश की कमी मनोदशा, उत्पादकता और समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। कई नॉर्वेवासियों को मौसमी मनोरोग विकार (एसएडी) का अनुभव होता है, जो एक प्रकार का अवसाद है और मौसम में बदलाव और सूर्य के प्रकाश के कम संपर्क से जुड़ा होता है।
  • इससे निपटने के लिए, कई लोग प्रकाश चिकित्सा का उपयोग करते हैं, जिसमें प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश की नकल करने वाले एक विशेष प्रकाश बॉक्स के सामने बैठना शामिल है। यह चिकित्सा मनोदशा में सुधार और अवसाद के लक्षणों को कम करने में प्रभावी साबित हुई है।
  • नॉर्वेवासी अक्सर इस दौरान परिवार और दोस्तों के साथ इकट्ठा होते हैं, पारंपरिक भोजन, संगीत और उत्सवों का आनंद लेते हैं। अंधेरा एक अनूठा वातावरण बनाता है जो लोगों को धीमा होने, चिंतन करने और जीवन की सरल चीजों की सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह आराम, चिंतन और आत्म-संबंध का समय है।

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