कार्रवाई वाहनों पर, लेकिन रेत माफिया अब भी बेखौफ ! केवा-नवापारा सहित दर्जनों स्थान से रेत का अवैध उत्खनन लगातार जारी
हसदेव नदी से रोजाना हो रहे अवैध उत्खनन पर नहीं लग रही लगाम, प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल

जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर प्रशासन लगातार कार्रवाई का दावा कर रहा है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में राजस्व एवं माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम द्वारा केवा, भादा और नवापारा घाट में अभियान चलाकर 5 हाइवा वाहनों को जब्त किया गया है। प्रशासन ने इसे अवैध रेत कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई बताया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हसदेव नदी से रोजाना बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है। नदी के भीतर जेसीबी और चैन माउंटेन मशीनें उतारकर दिन-रात खुदाई की जा रही है। यहां से प्रतिदिन 100 से 150 हाइवा और सैकड़ों ट्रैक्टरों के जरिए रेत का परिवहन जांजगीर-चांपा सहित आसपास के कई जिलों तक किया जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक इस अवैध कारोबार से जुड़े लोग रोजाना लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं और लगातार मालामाल हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई केवल रेत लेकर जा रहे दो-चार वाहनों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। यही वजह है कि अब प्रशासनिक कार्रवाई की मंशा और गंभीरता दोनों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
“असल सरगनाओं तक क्यों नहीं पहुंचती कार्रवाई?”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी निभाने का दिखावा कर रहा है। जबकि नदी के भीतर मशीनों से उत्खनन कराने वाले और पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े लोगों तक कभी कार्रवाई नहीं पहुंचती।
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो केवल वाहनों की जब्ती से काम नहीं चलेगा। अवैध उत्खनन में उपयोग हो रही जेसीबी और चैन माउंटेन मशीनों पर कार्रवाई करनी होगी, घाटों पर चल रहे पूरे सिंडिकेट को तोड़ना होगा और इस कारोबार से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच करनी होगी।
“रोजाना सैकड़ों वाहन निकलते हैं, फिर भी कार्रवाई केवल 5 पर?”
क्षेत्र में चर्चा है कि जब रोजाना 100 से अधिक हाइवा मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, तब केवल 5 वाहनों की जब्ती क्या वास्तव में प्रभावी कार्रवाई मानी जा सकती है? ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो एक ही दिन में बड़े स्तर पर कार्रवाई कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकता है।
हसदेव नदी का अस्तित्व संकट में, प्रशासन बेपरवाह
अंधाधुंध रेत उत्खनन के कारण हसदेव नदी की प्राकृतिक संरचना लगातार प्रभावित हो रही है। नदी का जलस्तर घटने, किनारों के कटाव और पर्यावरणीय नुकसान का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में नदी गंभीर संकट में पड़ सकती है।
अब तो प्रशासनिक कार्रवाई पर उठने लगे गंभीर सवाल
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अवैध कारोबार के “बड़े खिलाड़ियों” पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। अब लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर हसदेव नदी को खोखला कर रहे असली रेत माफियाओं पर शिकंजा कब कसेगा प्रशासन?




