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आस्था का अद्भुत केंद्र : नहर किनारे विराजे “नहरिया बाबा”, जहां थम जाती है ट्रेनों की रफ्तार

नहर किनारे विराजमान हैं बजरंगबली, इसलिए पड़ा “नहरिया बाबा” नाम, छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

राजेंद्र राठौर @ जांजगीर-चांपा। नहरिया बाबा हनुमान मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का ऐसा केंद्र बन चुका है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं और पूर्ण श्रद्धा से शीश नवाते हैं। जांजगीर के नैला क्षेत्र में नहर के किनारे विराजमान होने के कारण भगवान हनुमान को यहां “नहरिया बाबा” के नाम से जाना जाता है।

छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर आता है तो कोई संकटों से मुक्ति पाने की आस में बाबा के दरबार में माथा टेकता है। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रहती है और “जय श्रीराम” तथा “बजरंगबली की जय” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहता है।

लोट मारकर और धरना बांधकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

नहरिया बाबा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था इतनी गहरी है कि कई भक्त मन्नत पूरी होने पर धरना बांधते हैं और लोट मारते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि नहरिया बाबा सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी करते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर आज लोगों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1950 के आसपास से नहरिया बाबा यहां विराजमान हैं। मंदिर के एक ओर नहर बहती है तो दूसरी ओर मुम्बई-हावड़ा रेल लाइन गुजरती है। इस अनोखी स्थिति के कारण यह मंदिर वर्षों से लोगों के आकर्षण और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

बाबा के दरबार से गुजरते ही धीमी हो जाती है ट्रेन

मंदिर से जुड़ी सबसे रोचक और चर्चित मान्यता यह है कि मंदिर के पास से गुजरने वाली ट्रेनों की रफ्तार स्वतः धीमी हो जाती है। स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि कई बार ट्रेन चालक भी बाबा का आशीर्वाद लेने और प्रसाद ग्रहण करने के लिए ट्रेन रोक देते हैं। यही वजह है कि नहरिया बाबा की महिमा दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, मंदिर परिसर में दो मंदिर स्थित हैं। वर्षों पहले रेलवे विभाग ने मंदिर को हटाने का प्रयास किया था। उस दौरान श्रद्धालुओं ने नहरिया बाबा के लिए दूसरा मंदिर बनवा दिया। बाद में लोगों की गहरी आस्था और विश्वास को देखते हुए मंदिर को नहीं हटाया गया, तभी से दोनों मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना होती आ रही है।

मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है विशेष भीड़

वैसे तो प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है। इन दिनों भक्तों द्वारा हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। नहरिया बाबा के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धा और विश्वास का संबंध केवल परंपरा से नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और अनुभवों से भी जुड़ा होता है।

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