viral audio मामले में बढ़ीं साजिश और दबाव की चर्चाएं, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह पर मामला दबाने के प्रयास के आरोप
वाहन चालक पर दबाव बनाए जाने की खबरों से गरमाया माहौल, जांच और विभागीय कार्रवाई के बीच कई सवाल खड़े
जांजगीर-चांपा। सोशल मीडिया में वायरल हुए कथित ऑडियो मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह को लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक मामले को दबाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने की बातें सामने आ रही हैं, वहीं विभाग में पदस्थ वाहन चालक पर दबाव बनाए जाने की खबरें भी तेजी से फैल रही हैं।
बताया जा रहा है कि वायरल ऑडियो सामने आने के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया था। ऑडियो में कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा और अभद्र बातचीत सुनाई देने का दावा किया गया था। मामला सोशल मीडिया में तेजी से वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और जांच के निर्देश दिए।
इसी बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि पूरे मामले को शांत कराने और विवाद को दबाने के लिए अंदरखाने लगातार कोशिशें की जा रही हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वायरल ऑडियो से जुड़े वाहन चालक पर भी दबाव बनाए जाने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक और विभागीय गलियारों में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
लोगों का कहना है कि यदि जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है तो यह बेहद गंभीर मामला माना जाएगा। प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ऐसे आरोपों की भी जांच किए जाने की मांग उठने लगी है।
उल्लेखनीय है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने अपर कलेक्टर से जांच कराई थी। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने के लिए सचिव, जलसंसाधन विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है।
इधर, जिले में यह भी चर्चा है कि संबंधित अधिकारी लंबे समय से जिले में पदस्थ हैं और विभागीय कार्यशैली को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। वायरल ऑडियो मामले के बाद अब लोगों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और व्यापक जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
विभागीय कर्मचारियों में भी बढ़ी बेचैनी
मामले के तूल पकड़ने के बाद विभागीय कर्मचारियों के बीच भी असहजता का माहौल बताया जा रहा है। कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। लोगों का मानना है कि यदि दबाव बनाने जैसी बातें सही साबित होती हैं तो यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
वर्षों से जिले में जमे अधिकारी पर उठे सवाल
जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह को लेकर यह चर्चा तेज है कि वे लंबे समय से जिले में पदस्थ हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इंजीनियर पद से शुरुआत करते हुए एसडीओ और अब ईई तक का सफर इसी क्षेत्र में पूरा किया। लंबे समय तक एक ही जिले में पदस्थ रहने को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण आवश्यक माना जाता है।
वायरल ऑडियो के बाद कर्मचारियों में दहशत
वायरल ऑडियो मामले के बाद विभागीय कर्मचारियों के बीच भी माहौल तनावपूर्ण बताया जा रहा है। अंदरखाने यह चर्चा है कि मामले से जुड़े लोगों पर दबाव बनाए जाने की कोशिशें हो रही हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच लगातार चर्चाओं का दौर जारी है। कई लोगों का मानना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
अब सबकी नजर विभागीय फैसले पर
कलेक्टर जन्मेजय महोबे द्वारा जांच प्रतिवेदन के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने के बाद अब लोगों की नजरें जलसंसाधन विभाग पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि सचिव स्तर पर मामले की समीक्षा के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी। जिलेभर में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं और लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।




