नेशनल हाईवे-49 का ‘रहस्यमयी बैंक’: जहां न कैश काउंटर, न पासबुक… फिर भी हर शाम होता है हजारों के भरोसे का हिसाब
बनारी तिराहा की एक साधारण चाय दुकान पर दिनभर रुकते हैं वाहन चालक, शाम ढलते ही एटीएम से निकलती है रकम... आखिर क्या है इस पूरे खेल का राज!

जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-49 पर स्थित बनारी तिराहा इन दिनों एक अनोखी वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां मौजूद एक साधारण सी चाय दुकान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दुकान केवल चाय-नाश्ते का ठिकाना नहीं, बल्कि कुछ लोगों के लिए “अस्थायी बैंक” की तरह काम करती है।
चर्चाओं के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले कई वाहन चालक यहां नियमित रूप से रुकते हैं। देखने वालों के लिए यह सामान्य विराम लगता है, लेकिन जानकारों का दावा है कि यहीं किसी “आरडी” की तरह दिनभर रकम जमा होती रहती है।
सबसे दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि जैसे ही शाम ढलती है, संबंधित यातायात कर्मियों के हाथों में एटीएम के जरिए पूरे दिन की राशि पहुंच जाती है। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल तेजी से घूम रहा है कि आखिर एक चाय दुकान का एटीएम लेन-देन से क्या संबंध है?
यदि सब कुछ वैध है तो यह प्रक्रिया इतनी गोपनीय क्यों दिखाई देती है? और यदि इसमें कोई अनियमितता नहीं है, तो फिर यह सिलसिला खुलेआम होने के बावजूद जांच के दायरे से बाहर क्यों है?
हाईवे पर सफर करने वाले कई वाहन चालकों और आसपास के लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल लेन-देन तथा बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
लोगों के द्वारा लगाए जा रहे आरोप यदि सही हैं, तो यह मामला केवल अवैध वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल माध्यम से कथित लेन-देन के एक संगठित नेटवर्क की ओर भी इशारा कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बनारी तिराहा की यह चाय दुकान वास्तव में सिर्फ चाय बेचती है, या फिर यहां हर शाम किसी और “लेखा-जोखा” का भी हिसाब बराबर होता है?
फिलहाल, इस रहस्य से पर्दा उठाना अब जांच एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।





