Janjgir-Champa: भारतमाला मार्ग पर अब पूरी तरह रोक, लेकिन सवाल—आखिर निर्माणाधीन सड़क पर वाहनों को अब तक एंट्री कौन दे रहा था?
निर्माणाधीन और असुरक्षित घोषित किए गए भारतमाला मार्ग पर अब तो प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन जिन दिनों इस मार्ग पर लगातार वाहन गुजर रहे थे, उन दिनों आखिर उनकी एंट्री की जिम्मेदारी किस अधिकारी, विभाग या एजेंसी की थी? यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब अब आम जनता भी जानना चाहती है।

जांजगीर-चांपा। जिले में निर्माणाधीन भारतमाला मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यातायात पुलिस ने इसे सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम बताया है। लेकिन, इस फैसले के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि जब यह सड़क निर्माणाधीन थी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार नहीं थी, तब आखिर इतने दिनों तक इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही किसकी अनुमति से हो रही थी?
यातायात पुलिस के अनुसार, इस मार्ग पर न एम्बुलेंस की सुविधा थी, न फायर ब्रिगेड, न पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और न ही सीसीटीवी जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध थीं। इसके बावजूद छोटे-बड़े वाहन लगातार इस मार्ग का उपयोग कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी है।
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इधर, जांजगीर-चांपा पुलिस का दावा है कि पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) उदयन बेहार के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने पहले ही भारतमाला परियोजना के अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्माणाधीन मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकने की मांग की थी। इसके बाद परियोजना निदेशक ने उरगा–बलौदा–पंतोरा–बिलासपुर भारतमाला मार्ग को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया।
हालांकि, अब जब मार्ग बंद कर दिया गया है, तब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि यह सड़क शुरू से ही आम वाहनों के लिए सुरक्षित नहीं थी, तो आखिर इतने समय तक वाहनों को इस पर चलने की अनुमति क्यों दी गई? क्या संबंधित विभागों ने समय रहते पर्याप्त बैरिकेडिंग और निगरानी की व्यवस्था नहीं की थी? या फिर नियमों की अनदेखी कर वाहनों को प्रवेश मिलता रहा?
बहरहाल, निर्माणाधीन और असुरक्षित घोषित किए गए भारतमाला मार्ग पर अब तो प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन जिन दिनों इस मार्ग पर लगातार वाहन गुजर रहे थे, उन दिनों आखिर उनकी एंट्री की जिम्मेदारी किस अधिकारी, विभाग या एजेंसी की थी? यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब अब आम जनता भी जानना चाहती है।







