Janjgir-Champa News 84 फरियादी पहुंचे कलेक्टर दरबार: क्या तहसील, पंचायत और विभागीय दफ्तरों में नहीं सुन रहे अधिकारी?
राशन कार्ड, नामांतरण, सीमांकन, रिकॉर्ड दुरुस्ती और व्हीलचेयर जैसी समस्याओं के लिए भी लोगों को लगानी पड़ रही कलेक्टर से गुहार

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। कलेक्टोरेट में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में मंगलवार को 84 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें कई ऐसे मामले सामने आए, जिनका समाधान सामान्यतः तहसील, पंचायत, खाद्य विभाग, राजस्व विभाग अथवा संबंधित स्थानीय कार्यालय स्तर पर किया जा सकता था। इसके बावजूद आम नागरिकों को अपनी समस्याएं लेकर सीधे कलेक्टर के समक्ष पहुंचना पड़ा।

जनदर्शन में किसी ने राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की मांग की, तो किसी ने राशन कार्ड बनवाने की गुहार लगाई। वहीं नाम जोड़ने, सीमांकन, खाता विभाजन, बेजा कब्जा हटाने, व्हीलचेयर उपलब्ध कराने और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधी आवेदन भी प्रस्तुत किए गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभागीय अधिकारी और मैदानी अमला अपने स्तर पर समय पर कार्रवाई कर रहे हैं, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ रहा है? ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से कई किलोमीटर का सफर तय कर नागरिकों का जनदर्शन में पहुंचना स्थानीय स्तर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
राशन कार्ड, राजस्व रिकॉर्ड सुधार, नामांतरण, सीमांकन और योजना लाभ जैसे मामलों के लिए आमतौर पर संबंधित विभागों में निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। इसके बावजूद लोगों को कलेक्टर तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं निचले स्तर पर शिकायतों के निराकरण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
हालांकि, कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए हैं, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है कि जिन मामलों का समाधान स्थानीय कार्यालयों में होना चाहिए था, वे आखिर कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचे ही क्यों?




