कसडोल से जली रामकथा की ज्योति, आज प्रदेशभर में आस्था की अलख जगा रही है रविवारीय रामकथा की परंपरा
चित्रोत्पला गंगा के पावन त्रिवेणी संगम तट स्थित भगवान श्री शिवरीनारायण की पावन नगरी में आयोजित रविवारीय रामकथा में पहुंचे महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुन्दर दास जी महाराज ने इस परंपरा के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि रविवारीय रामकथा का बीजारोपण कसडोल में हुआ था। वहां से निकली यह आध्यात्मिक ज्योति समय के साथ प्रदेश के अनेक स्थानों तक पहुंची और आज इसकी कई शाखाएं समाज में रामभक्ति का संदेश दे रही हैं।

राजेंद्र राठौर@शिवरीनारायण। एक छोटी-सी धार्मिक पहल ने समय के साथ जनआस्था का ऐसा विराट स्वरूप धारण कर लिया कि आज उसकी गूंज छत्तीसगढ़ के अनेक शहरों और गांवों तक पहुंच चुकी है। मारुति मानस प्रचार समिति, कसडोल से प्रारंभ हुई रविवारीय रामकथा की परंपरा आज श्रद्धा, संस्कार और सनातन संस्कृति के संरक्षण का सशक्त अभियान बन चुकी है। इसी परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में शिवरीनारायण मठ में प्रत्येक रविवार आयोजित होने वाली रामकथा हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गई है।

चित्रोत्पला गंगा के पावन त्रिवेणी संगम तट स्थित भगवान श्री शिवरीनारायण की पावन नगरी में आयोजित रविवारीय रामकथा में पहुंचे महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुन्दर दास महाराज ने इस परंपरा के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि रविवारीय रामकथा का बीजारोपण कसडोल में हुआ था। वहां से निकली यह आध्यात्मिक ज्योति समय के साथ प्रदेश के अनेक स्थानों तक पहुंची और आज इसकी कई शाखाएं समाज में रामभक्ति का संदेश दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण मठ की रामकथा भी उसी आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत स्वरूप है, जिसे आगे बढ़ाने में ब्रह्मलीन महंत परमानंद दास जी महाराज का विशेष योगदान रहा। वे समय-समय पर यहां आकर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते थे और इस आयोजन को निरंतर प्रेरणा देते रहे।

महामंडलेश्वर ने श्रद्धालुओं से कहा कि केवल कथा सुनना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना ही रामकथा का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में नियमित रामकथा होती है, वहां संस्कार, सद्भाव और नैतिक मूल्यों का संरक्षण स्वतः होता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं श्रीरामचरितमानस की आरती से हुआ। इसके बाद मानस मर्मज्ञों एवं प्रवक्ताओं ने श्रीराम के आदर्श जीवन, भक्ति और धर्म पर आधारित प्रेरक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान रामधुन, भजन और मानस गायन से पूरा शिवरीनारायण मठ परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

इस अवसर पर प्रमुख मानस प्रवक्ता के रूप में मानस मर्मज्ञ राधेकृष्ण दास (बरगढ़, ओडिशा), भागवताचार्य योगेश शर्मा (शिवरीनारायण), भगत राम साहू, श्रीमती रामकुमारी साहू (मुड़पार), शिवकुमार द्विवेदी (जैजैपुर), परस पटेल (दर्राभाठा), नेहरू प्रधान (कुम्हारी), कोमल साहू (खरौद), सीताराम डडसेन (पुरगांव), गंगाराम पटेल (कौवालाल), बिहारीलाल भारद्वाज (खरौद) तथा बहादुर श्रीवास सहित अनेक मानस मर्मज्ञों ने श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, भक्ति और धर्म की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान मानस गायन समितियों द्वारा प्रस्तुत संगीतमय भजनों और चौपाइयों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान रहा और श्रद्धालु देर तक भक्ति रस में डूबे रहे।

कार्यक्रम का आयोजन शिवरीनारायण मठ ट्रस्ट समिति के तत्वावधान में किया गया। आयोजन को सफल बनाने में निरंजन लाल अग्रवाल, सुखराम दास, त्यागी महाराज, निर्मल दास वैष्णव, खगेंद्र पांडे, भूपेंद्र पांडे, पुरेंद्र सोनी, हर्ष दुबे सहित ट्रस्ट के सदस्यों और नगर के अनेक श्रद्धालुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
धर्माचार्यों ने रविवारीय रामकथा को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सनातन संस्कृति, पारिवारिक संस्कार और रामभक्ति को जीवित रखने वाला जनआंदोलन बताया, जिसकी शुरुआत कसडोल से हुई और जो आज पूरे प्रदेश में श्रद्धा का मजबूत आधार बन चुका है।




