सक्ती जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में छात्र की संदिग्ध आत्महत्या, परिजनों ने हॉस्टल अधीक्षक पर लगाए प्रताड़ना के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
कलेक्टर से गुहार लगाने के कुछ दिन बाद ही छात्र ने की आत्महत्या, पलाड़ीकला स्थित एकलव्य छात्रावास की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल

राजेंद्र राठौर@सक्ती। सक्ती जिले के पलाड़ी कला स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में 6 अगस्त गुरुवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। कक्षा 9वीं के छात्र ओमेश कुमार कंवर, निवासी ग्राम बासीन ने छात्रावास परिसर के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था। घटना के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि छात्रावास में लगातार प्रताड़ना का माहौल था और छात्र मानसिक दबाव में था। परिजनों ने छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि प्रताड़ना के कारण ही छात्र ने यह कदम उठाया।
कुछ दिन पहले ही छात्रों ने की थी शिकायत
इस घटना ने इसलिए भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि कुछ दिन पहले ही इसी विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर छात्रावास की अव्यवस्था, अनुशासन के नाम पर प्रताड़ना तथा अन्य समस्याओं की लिखित शिकायत की थी। शिकायत में हॉस्टल के वातावरण, व्यवस्थाओं और छात्रों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
हालांकि, शिकायत के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से किसी प्रभावी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। अब छात्र की मौत के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया जाता, तो क्या इस घटना को रोका जा सकता था।
जांच का विषय हैं प्रताड़ना के आरोप
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की। प्रताड़ना के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस छात्र के सहपाठियों, विद्यालय प्रबंधन, छात्रावास कर्मचारियों और परिजनों के बयान दर्ज कर रही है। यदि कोई सुसाइड नोट या अन्य साक्ष्य मिलते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
परिजनों की मांग
मृतक छात्र के परिजनों ने मांग की है कि—
- छात्रावास अधीक्षक को तत्काल निलंबित किया जाए।
- प्रताड़ना के आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
- पूरे छात्रावास की व्यवस्थाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कई सवालों के घेरे में व्यवस्था
यह घटना एकलव्य आवासीय विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शिकायतों के निराकरण और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि पूर्व में छात्रों द्वारा की गई शिकायतें सही थीं, तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि शिकायतें निराधार थीं, तो उनकी विधिवत जांच का रिकॉर्ड क्या है? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।





