कुछ दिन पहले छात्रों ने कलेक्टर से की थी प्रताड़ना और अव्यवस्थाओं की शिकायत, अब एकलव्य छात्रावास में छात्र की आत्महत्या ने खड़े किए गंभीर सवाल
छात्रों की शिकायतों के बावजूद नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई, अब प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

राजेंद्र राठौर@सक्ती। सक्ती जिले के पलाड़ी कला स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं के छात्र ओमेश कुमार कंवर द्वारा छात्रावास के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। छात्र की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस दर्दनाक घटना को समय रहते रोका जा सकता था?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले इसी विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से कलेक्टर अमृत विकास तोपनो से मुलाकात कर छात्रावास की अव्यवस्था, अनुशासन के नाम पर प्रताड़ना तथा अन्य गंभीर समस्याओं की लिखित शिकायत की थी। छात्रों ने छात्रावास के माहौल और जिम्मेदार अधिकारियों के व्यवहार को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई थी।
हालांकि शिकायत के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। अब जब एक छात्र ने आत्मघाती कदम उठा लिया है, तो शिकायतों की अनदेखी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो शायद बच जाती एक जान
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि छात्रों की शिकायतों की समय पर निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती, तो संभव है कि हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। अब छात्र की मौत के बाद वही शिकायतें फिर चर्चा का विषय बन गई हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
परिजनों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
मृतक छात्र के परिजनों का आरोप है कि छात्र लंबे समय से मानसिक दबाव में था और छात्रावास में प्रताड़ना का सामना कर रहा था। परिजनों ने हॉस्टल अधीक्षक को तत्काल निलंबित कर उसके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस और प्रशासन जांच में जुटे
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस छात्रावास के अन्य छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और परिजनों के बयान दर्ज कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि पूर्व में हुई शिकायतों का स्वरूप क्या था और उन पर प्रशासन ने क्या कार्रवाई की थी।
अब उठ रहे ये बड़े सवाल
- छात्रों की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
- क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई गई थी?
- यदि शिकायतें सही थीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या छात्र मानसिक दबाव में था और यदि था तो इसकी जानकारी प्रबंधन को थी?
- आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं कि एक छात्र ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया?
उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
घटना के बाद परिजनों, स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, शिकायतों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
नोट: इस समाचार में प्रताड़ना संबंधी बातें परिजनों और पूर्व शिकायतों के आधार पर आरोप के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। आत्महत्या के कारणों और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच एवं आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही मानी जाएगी।




