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Sakti: प्रेम कहानी, चार लाख की सुपारी और 3 राज्यों तक फैला कनेक्शन… 96 घंटे की जांच में पुलिस ने सुलझाई पूर्णिमा चौहान ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी

पति-पत्नी ने मिलकर प्रेमिका को रास्ते से हटाने की बनाई साजिश, झारखंड से शूटर, महाराष्ट्र तक भागे आरोपी, मोबाइल लोकेशन और सीडीआर बने सबसे बड़े गवाह

शहजाद खान@सक्ती। ग्राम जोंगरा में बीते 26 जून को हुई पूर्णिमा चौहान उर्फ पूनम की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। नकाबपोश बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया और कुछ ही मिनटों में फरार हो गए। शुरुआती जांच में मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर नजर आ रहा था, लेकिन पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर इस हत्याकांड की ऐसी परतें खोलीं कि यह मामला प्रेम प्रसंग, विश्वासघात, सुपारी किलिंग और अंतरराज्यीय अपराध का बड़ा नेटवर्क बनकर सामने आया।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस हत्या की पटकथा किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं, बल्कि मृतका के प्रेम संबंध से परेशान एक दंपति ने लिखी थी। महिला को रास्ते से हटाने के लिए चार लाख रुपये की सुपारी दी गई और हत्या की पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से बनाई गई।

जांच में सामने आया कि मृतका पूर्णिमा चौहान और रायगढ़ जिले के देल्लारी निवासी मुरलीशंकर चौहान आयुर्वेदिक दवाइयों के प्रचार-प्रसार का काम साथ करते थे। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हो गए। जब इसकी जानकारी मुरलीशंकर की पत्नी चम्पा चौहान को हुई तो परिवार में लगातार विवाद होने लगा। पत्नी के विरोध के बाद मुरलीशंकर ने मृतका से दूरी बनाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के अनुसार पूर्णिमा लगातार उस पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी तनाव ने अंततः हत्या की साजिश का रूप ले लिया।

पुलिस के मुताबिक, मुरलीशंकर और उसकी पत्नी चम्पा ने राजेंद्र महंत से संपर्क कर चार लाख रुपये में हत्या की सुपारी तय की। योजना के अनुसार वारदात को अंजाम देने के लिए कई लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं। कोई हथियार लेकर आया, किसी ने बाइक उपलब्ध कराई, किसी ने आरोपियों को दूसरे राज्यों में फरार कराया तो किसी ने सुपारी की रकम का बंटवारा कराया।

26 जून को योजना के मुताबिक, गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत बाइक से जोंगरा पहुंचे। जैसे ही पूर्णिमा सामने आई, गौरीशंकर ने पिस्तौल से उस पर गोलियां दाग दीं और दोनों मौके से फरार हो गए। बाद में उनके भागने और छिपने की पूरी व्यवस्था पहले से तय नेटवर्क ने की।

इस पूरे मामले में पुलिस की सबसे बड़ी सफलता तकनीकी जांच साबित हुई। मोबाइल टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज और लगातार बदल रही आरोपियों की लोकेशन ने पुलिस को हत्या की साजिश तक पहुंचा दिया। जांच के दौरान राजेंद्र महंत की लोकेशन झारखंड के जमशेदपुर और दो अन्य आरोपियों की लोकेशन महाराष्ट्र के पुणे में मिली। पुलिस टीम ने दोनों राज्यों में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में एक-एक कर पूरी साजिश सामने आ गई। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, घटना स्थल से तीन खाली खोखे, वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, कई मोबाइल फोन, बैंक पासबुक तथा सुपारी की रकम में बची नकदी बरामद कर ली है।

इस मामले में पुलिस ने कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें चम्पा चौहान, मुरलीशंकर चौहान, राजेंद्र महंत, गौरीशंकर सिदार, सुनील महंत, राकेश महंत, वेद प्रकाश महंत उर्फ सोनू, सुमित गबेल और चंद्रशेखर महंत शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी डॉ. भुवनेश्वरी पैंकरा के पर्यवेक्षण में गठित विशेष टीम ने लगातार 96 घंटे तक तकनीकी और फील्ड जांच कर इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाई। पुलिस का दावा है कि हत्या से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

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