रूस की धरती से लौटीं अकलतरा की होनहार बेटी, दो बहनों ने रचा इतिहास; अब भाई भी डॉक्टर बनने की राह पर
परसदा-तिलई के मानसर परिवार ने पेश की शिक्षा और संकल्प की मिसाल, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर

राजेंद्र राठौर@अकलतरा। सपनों को साकार करने के लिए सीमाएं मायने नहीं रखतीं। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है अकलतरा विकासखंड के ग्राम परसदा (तिलई) की होनहार बेटी डॉ. जया मानसर ने, जिन्होंने रूस की प्रतिष्ठित परम यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर स्वदेश लौटते ही अपने परिवार के साथ पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।
डॉ. जया मानसर, राजेंद्र कुमार मानसर एवं श्रीमती सरिता मानसर (शिक्षिका) की सुपुत्री हैं। कठिन परिश्रम, अनुशासन और अटूट लगन के बल पर उन्होंने चिकित्सा शिक्षा पूरी कर एक नई उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई है। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि मानसर परिवार की बड़ी बेटी डॉ. ज्योति मानसर भी वर्ष 2025 में रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बन चुकी हैं। अब परिवार की दूसरी बेटी डॉ. जया ने भी डॉक्टर बनकर इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। वहीं छोटे भाई गीतेश कुमार मानसर वर्तमान में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। एक ही परिवार से लगातार चिकित्सा क्षेत्र में हो रही उपलब्धियों ने पूरे इलाके में मानसर परिवार को प्रेरणा का केंद्र बना दिया है।
बचपन से ही मेधावी और प्रतिभाशाली रही डॉ. जया ने अपनी मेहनत और समर्पण से यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उनके स्वदेश लौटने पर परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान पूरे माहौल में गर्व और खुशी का भाव साफ दिखाई दिया।
स्वागत समारोह में जीवन लाल यादव, साकेत पाण्डेय, गीता कौशिक, दुलार सिंह ठाकुर, राजेंद्र कुमार मानसर, गीतेश कुमार मानसर, डॉ. ज्योति मानसर, हेम सिंह राज सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने डॉ. जया को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
एक परिवार… दो डॉक्टर, तीसरा भी तैयारी में
मानसर परिवार की यह उपलब्धि केवल एक परिवार की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि ग्रामीण अंचल के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा हासिल कर देश और समाज की सेवा का सपना साकार कर सकते हैं। आज परसदा (तिलई) ही नहीं, पूरा अकलतरा क्षेत्र अपनी इस होनहार बेटी की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।





