बाराद्वार रोड पर आधी रात का ‘मिस्ट्री ऑपरेशन’! रेनकोट, नकाब और डेढ़ लाख की चोरी… क्या एक ही गैंग दे रहा वारदातों को अंजाम?
सिंह ढाबा के पास स्थित एस.एन. मोटर्स (ऑटो पार्ट्स) को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बदमाश दुकान से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद के अलावा मोटर पार्ट्स और अन्य सामान लेकर फरार हो गए।

सक्ती| स्पेशल रिपोर्ट। रात का सन्नाटा… लगातार होती बारिश… सड़कें लगभग खाली… और ठीक रात 1:30 बजे शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक बाराद्वार रोड पर एक ऐसी वारदात होती है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीती रात में सिंह ढाबा के पास स्थित एस.एन. मोटर्स (ऑटो पार्ट्स) को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बदमाश दुकान से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद के अलावा मोटर पार्ट्स और अन्य सामान लेकर फरार हो गए।
रेनकोट और नकाब… क्या पहले से थी पूरी तैयारी?
घटना के सबसे रहस्यमय पहलुओं में से एक यह है कि संदिग्ध रेनकोट पहने हुए और चेहरे पर नकाब लगाए दिखाई दिए। बारिश के बीच पहचान छिपाने का यह तरीका किसी सामान्य चोरी से अधिक सुनियोजित योजना की ओर इशारा करता है। पूरी गतिविधि दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है।
क्या दुकान की रेकी पहले ही कर ली गई थी?
चोर सीधे उसी जगह पहुंचे, जहां नकदी रखी थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें पहले से दुकान की अंदरूनी व्यवस्था और गल्ले की जानकारी थी? या फिर वारदात से पहले किसी ने दुकान की रेकी की थी? फिलहाल, पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पुरानी वारदात से मिल रही समानता
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कुछ समय पहले सुनील सेठ की दुकान में भी लगभग इसी तरह चोरी हुई थी। दोनों घटनाओं में समय, तरीका और पहचान छिपाने की शैली काफी हद तक मिलती-जुलती बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक दोनों मामलों में किसी समान गिरोह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
व्यापारियों में बढ़ी चिंता, सुरक्षा की मांग तेज
बाराद्वार रोड देर रात तक सक्रिय रहने वाला इलाका माना जाता है। इसके बावजूद इतनी बड़ी चोरी होने से व्यापारियों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने रात में पुलिस गश्त बढ़ाने और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
जांच जारी, कई सवालों के जवाब बाकी
सक्ती पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कोई पेशेवर चोरी करने वाला संगठित गिरोह है, जिसने बारिश की रात को अपनी ढाल बनाया? या फिर इसके पीछे कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसे दुकान की पूरी जानकारी पहले से थी? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।





