हद हो गई! जिला अस्पताल जांजगीर से नौकरी छोड़ चुके और सेवा समाप्त डॉक्टर भी बन गए शासन के ‘पदनामित चिकित्सक’
छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग की सूची में दो चिकित्सकों के नाम देख हर कोई हो रहा हैरान, विभागीय समन्वय पर उठे सवाल

राजेन्द्र राठौर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश ने स्वास्थ्य महकमे में नई चर्चा छेड़ दी है। आश्चर्य की बात यह है कि जिन दो चिकित्सकों की सेवाएं जिला अस्पताल जांजगीर में पहले ही समाप्त हो चुकी थीं अथवा जिन्होंने नौकरी छोड़ दी थी, उनके नाम बाद में जारी शासन के पदनामन आदेश में शामिल कर दिए गए।
मामला 25 मई 2026 को चिकित्सा शिक्षा विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा जारी उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें जांजगीर-चांपा जिले के कुल 33 विशेषज्ञ एवं अन्य चिकित्सकों को प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत बिना किसी वित्तीय लाभ के चिकित्सा शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति पर पदनामित किया गया है। जारी सूची में मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लोकेन्द्र कश्यप तथा एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. मेहुल केडिया के नाम भी दर्ज हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आदेश जारी होने के समय दोनों चिकित्सक जिला अस्पताल में कार्यरत ही नहीं थे। जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया में शासन विरोधी पोस्ट एवं गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपों के चलते राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक द्वारा डॉ. लोकेन्द्र कश्यप को 5 मई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद शासन ने 11 मई 2026 को उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया था। वहीं दूसरी ओर, डॉ. मेहुल केडिया ने करीब तीन माह पहले रायपुर मेडिकल कॉलेज में अस्थि रोग की उच्च शिक्षा प्राप्त करने का हवाला देते हुए जिला अस्पताल जांजगीर की नौकरी छोड़ दी थी। ऐसे में 25 मई 2026 को जारी सूची में उनका नाम शामिल होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
फरवरी-मार्च 2026 में मांगा था प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने फरवरी-मार्च 2026 में जिलों से विशेषज्ञ चिकित्सकों के नामों का प्रस्ताव मांगा था। माना जा रहा है कि उसी दौरान भेजी गई सूची के आधार पर पदनामन आदेश जारी किया गया। लेकिन, प्रस्ताव भेजे जाने और अंतिम आदेश जारी होने के बीच परिस्थितियां बदल चुकी थीं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा सूची का पुनरीक्षण नहीं किया गया।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न
अब यह आदेश सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है और लोग पूछ रहे हैं कि जब एक चिकित्सक की सेवा समाप्त हो चुकी थी तथा दूसरा नौकरी छोड़ चुका था, तब शासन ने आखिर किस आधार पर उनकी सेवाएं लेने का आदेश जारी कर दिया? स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच समन्वय की कमी का यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
अब मामले में उठ रहे प्रमुख सवाल
इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पदनामन सूची जारी करने से पहले संबंधित चिकित्सकों की वर्तमान सेवा स्थिति की जांच की गई थी? सेवा समाप्त और इस्तीफा दे चुके चिकित्सकों के नाम सूची में कैसे शामिल हो गए? क्या विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए? क्या आदेश में संशोधन जारी किया जाएगा? फिलहाल, यह मामला स्वास्थ्य महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।






