1600 साल पुरानी आस्था के सामने नतमस्तक हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय , ठठारी के चतुर्भुज विष्णु मंदिर में मांगा प्रदेश की खुशहाली का आशीर्वाद
इसके बाद मुख्यमंत्री सीधे जनचौपाल में पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों से आमने-सामने चर्चा की। लोगों ने अपनी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

शहजाद खान@सक्ती। सुशासन तिहार के दौरान शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सक्ती जिले के छोटे से गांव ठठारी पहुंचे और यहां स्थित ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

सबसे खास बात यह है कि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा चौथी शताब्दी की मानी जाती है। यानी यह प्रतिमा करीब 1600 वर्ष पुरानी विरासत की साक्षी है। ऐसे ऐतिहासिक और आस्था के केंद्र में मुख्यमंत्री का पहुंचना ग्रामीणों के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं रहा। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की समृद्धि और जनकल्याण ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने भगवान विष्णु से छत्तीसगढ़ के विकास, शांति और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा। इसके बाद मुख्यमंत्री सीधे जनचौपाल में पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों से आमने-सामने चर्चा की। लोगों ने अपनी समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

मुख्यमंत्री के आगमन से पूरे ठठारी गांव में उत्साह का माहौल रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर परिसर और जनचौपाल में मौजूद रहे। लोगों का कहना था कि गांव की ऐतिहासिक पहचान को पहली बार इतनी बड़ी पहचान मिली है। इस अवसर पर जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद कमलेश जांगड़े, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
ठठारी का चतुर्भुज विष्णु मंदिर क्यों है खास?
🔸 प्रतिमा को चौथी शताब्दी का माना जाता है।
🔸 क्षेत्र की सबसे प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल।
🔸 पुरातात्विक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल।
🔸 वर्षों से स्थानीय श्रद्धा और आस्था का केंद्र।
🔸 मुख्यमंत्री के दौरे के बाद मंदिर एक बार फिर चर्चा में आया।




