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देव सेवा समिति के वृद्धाश्रम की दर्दनाक तस्वीर ने झकझोरा: इलाज के अभाव में तड़पती रही 75 वर्षीय डोकरी बाई, मौत के घंटों बाद भी नहीं पहुंची संचालिका

यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जो बुजुर्गों की सेवा और देखभाल के नाम पर संचालित हो रही है।

NKD@पामगढ़। उम्र के आखिरी पड़ाव में सहारे की उम्मीद लेकर वृद्धाश्रम पहुंची 75 वर्षीय डोकरी बाई को शायद यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि जिंदगी का अंत इतना दर्दनाक और उपेक्षित होगा। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ स्थित देव सेवा समिति वृद्धाश्रम में रहने वाली इस बुजुर्ग महिला की इलाज के अभाव में मौत हो गई, लेकिन इससे भी अधिक शर्मनाक यह रहा कि मौत के लगभग 11 घंटे बाद तक उसकी लाश उसी बिस्तर पर पड़ी रही, जहां उसने अंतिम सांस ली थी।

यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जो बुजुर्गों की सेवा और देखभाल के नाम पर संचालित हो रही है। जानकारी के अनुसार, सक्ती जिले की रहने वाली डोकरी बाई पिछले दो वर्षों से पामगढ़ के देव सेवा समिति वृद्धाश्रम में रह रही थी। वृद्धाश्रम के कर्मचारियों ने बताया कि वह पिछले करीब 15 दिनों से लगातार बीमार चल रही थी। कर्मचारियों ने कई बार इसकी जानकारी वृद्धाश्रम संचालिका अगम बर्मन को दी, लेकिन महिला के इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई।

बताया जा रहा है कि संचालिका कई बार पामगढ़ आईं, लेकिन बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल ले जाने या डॉक्टर दिखाने की जरूरत तक नहीं समझी गई। आखिरकार बुधवार तड़के करीब 4 बजे डोकरी बाई ने बिस्तर पर ही दम तोड़ दिया।

सुबह हुई मौत की जानकारी, फिर भी नहीं पहुंची संचालिका

सुबह जब वृद्धाश्रम कर्मचारी अन्य बुजुर्गों को उठाने पहुंचे, तब महिला की मौत की जानकारी हुई। कर्मचारियों ने तत्काल इसकी सूचना संचालिका को दी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा। जब इस घटना की जानकारी वार्ड पार्षद और नगर पंचायत अध्यक्ष को मिली, तब वे वृद्धाश्रम पहुंचे और संचालिका से फोन पर संपर्क किया। आरोप है कि संचालिका ने “घर में मेहमान आने” का बहाना बनाते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इधर, वृद्ध महिला की लाश घंटों तक उसी बिस्तर पर पड़ी रही। खबर लिखे जाने तक पुलिस मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई कर रही थी।

क्या सिर्फ कागजों में चल रही है बुजुर्गों की सेवा?

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकार बुजुर्गों की देखभाल और आश्रय के लिए लाखों रुपये खर्च करती है, ताकि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें सम्मान, सुरक्षा और इलाज मिल सके। लेकिन, पामगढ़ वृद्धाश्रम की यह तस्वीर व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करती है। जिस जगह को बुजुर्गों का सहारा होना चाहिए था, वहीं एक बुजुर्ग महिला इलाज के अभाव में दम तोड़ देती है और उसकी मौत के बाद भी घंटों तक कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं रहता।

वृद्धाश्रम के नाम पर केवल जेब भरने का चल रहा है खेल 

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस वृद्धाश्रम की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। संचालिका पर कथित घपलेबाजी और लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। अब इस घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। यह सिर्फ डोकरी बाई की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम बुजुर्गों की पीड़ा है, जो अपनों से दूर किसी आश्रम में सम्मान और देखभाल की उम्मीद लेकर जिंदगी गुजार रहे हैं।

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