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Janjgir-Champa: अब किताबों से नहीं, खेल-खेल में सीखेंगे पैसे का गणित, जिले के पांच स्कूलों में शुरू होंगी फाइनेंशियल लैब

बचत, निवेश, बैंकिंग और साइबर फ्रॉड से बचाव की मिलेगी व्यवहारिक शिक्षा, विद्यार्थी बनेंगे ‘फाइनेंशियली स्मार्ट’

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा। आज के दौर में जहां ऑनलाइन लेन-देन, डिजिटल बैंकिंग और निवेश आम जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं बच्चों को कम उम्र से ही आर्थिक समझ देने की दिशा में जांजगीर-चांपा जिला एक नई पहल का गवाह बनने जा रहा है।

जिले के पांच शासकीय विद्यालयों में स्थापित की गई वित्तीय प्रयोगशालाएं (फाइनेंशियल लैब) अब विद्यार्थियों को किताबों के पन्नों से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन की आर्थिक चुनौतियों और अवसरों को समझने का मंच देंगी।

यह पहल इसलिए भी खास है क्योंकि, यहां बच्चों को बैंकिंग, बचत, निवेश, बजट निर्माण, बीमा, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जैसे विषय पारंपरिक कक्षा शिक्षण के बजाय गेम, रोल प्ले, सिमुलेशन और गतिविधियों के माध्यम से सिखाए जाएंगे। यानी विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ यह भी सीखेंगे कि पैसे का सही प्रबंधन कैसे किया जाए और आर्थिक फैसले समझदारी से कैसे लिए जाएं।

‘मनी मैनेजमेंट’ बनेगा जीवन कौशल

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय साक्षरता अब केवल व्यापार या बैंकिंग क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह हर व्यक्ति के लिए आवश्यक जीवन कौशल बन चुकी है। ऐसे में स्कूल स्तर पर वित्तीय शिक्षा की शुरुआत विद्यार्थियों को भविष्य में आर्थिक रूप से अधिक जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी। इसी उद्देश्य से जिले के पांच विद्यालयों- स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय अकलतरा, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बलौदा, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पामगढ़, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बिर्रा और पीएम श्री विद्यालय नवागढ़ में वित्तीय प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

शिक्षकों को दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण

इन प्रयोगशालाओं के प्रभावी संचालन के लिए शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें वित्तीय अवधारणाओं को रोचक और व्यवहारिक तरीके से पढ़ाने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों और मॉडल्स के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि कैसे जटिल आर्थिक विषयों को बच्चों के लिए आसान और दिलचस्प बनाया जा सकता है।

ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर सुरक्षा पर फोकस

डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों को देखते हुए वित्तीय प्रयोगशालाओं में साइबर सुरक्षा को भी प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को डिजिटल भुगतान के सुरक्षित तरीके, ऑनलाइन ठगी से बचाव और वित्तीय जोखिमों की पहचान जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।

भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयारी

कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा कि वित्तीय साक्षरता वर्तमान समय की आवश्यकता है और यह पहल विद्यार्थियों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में सही आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करेगी। उनका मानना है कि सहभागितापूर्ण और खेल आधारित शिक्षण बच्चों को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेगा। आईडीबीआई बैंक की सीएसआर परियोजना के अंतर्गत जिला प्रशासन और संस्था सी फॉर कॉमर्स के सहयोग से संचालित यह पहल जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयोग के रूप में देखी जा रही है।

पैसे की समझ, बचत की आदत और आर्थिक जिम्मेदारी

उल्लेखनीय है कि पहली बार जिले के सरकारी स्कूलों में ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां बच्चे केवल गणित नहीं, बल्कि पैसे की समझ, बचत की आदत और आर्थिक जिम्मेदारी भी सीखेंगे। आने वाले समय में यह पहल विद्यार्थियों को ‘पढ़े-लिखे’ ही नहीं, बल्कि ‘वित्तीय रूप से समझदार’ नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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