सड़क पर तड़पती गौमाता के लिए “देवदूत” बने हथनेवरा गांव के युवा, अपनी जेब खर्च से चला रहे गौ सेवा धाम
पांच वर्षों से निःस्वार्थ सेवा में जुटी टीम, 30 किलोमीटर तक सेवा, अब तक 700 से अधिक घायल गौ वंशों को दिया नया जीवन

राजेन्द्र राठौर/जांजगीर-चांपा। आज के समय में जब अधिकांश लोग सड़क पर घायल पड़े पशुओं को देखकर नजरें फेर लेते हैं, ऐसे दौर में जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम हथनेवरा के कुछ युवाओं ने मानवता, करुणा और सेवा की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल छू लिया है। इन युवाओं द्वारा संचालित “गौ सेवा धाम हथनेवरा” आज उन बेसहारा और घायल गौ वंशों के लिए जीवनदाता बन चुका है, जो सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होकर तड़पते रहते हैं।
दरअसल, जांजगीर-चांपा से होकर गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 49 चौबीसों घंटे भारी वाहनों की आवाजाही से व्यस्त रहता है। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर आए दिन कई गौ वंश गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कई बार तो उपचार के अभाव में उनकी मौत तक हो जाती है। सबसे दुखद स्थिति यह है कि आधुनिक जीवनशैली में लोग गायों को केवल तब तक पालते हैं, जब तक वे दूध देती हैं। दूध बंद होते ही उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है और वही बेसहारा गौ वंश सड़क दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं।
ऐसी ही पीड़ा को देखकर ग्राम हथनेवरा के युवाओं ने केवल चिंता व्यक्त करने के बजाय सेवा का रास्ता चुना। गांव के युवाओं ने मिलकर “गौ सेवा धाम” की स्थापना की और आज यह सेवा कार्य पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का केंद्र बन गया है। गौ सेवा धाम के संचालक युवराज सिंह चंदेल, भावेश वस्त्रकर, किशन पाल एवं प्रकाश साहू ने बताया कि उनकी टीम में लगभग 45 से 50 लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें 8 से 10 सदस्य हर समय सक्रिय रहकर सेवा कार्य करते हैं।
पिछले लगभग पांच वर्षों से यह टीम लगातार घायल और बीमार गौ वंशों की सेवा में लगी हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 600 से 700 गौ वंशों का उपचार, संरक्षण और देखभाल उनकी टीम द्वारा की जा चुकी है। कई गौ वंश ऐसे थे, जो गंभीर अवस्था में अंतिम सांसें गिन रहे थे, लेकिन युवाओं की अथक सेवा और उपचार से वे फिर स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जीने लगे।
ग्राम हथनेवरा में हाई स्कूल के पीछे स्थित ग्राम पंचायत के शासकीय भवन में फिलहाल गौ सेवा धाम संचालित हो रहा है। यहां घायल गौ वंशों के लिए उपचार, भोजन, पानी और देखभाल की समुचित व्यवस्था की जाती है। सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंचती है। यदि वहीं उपचार संभव हो तो प्राथमिक इलाज किया जाता है, अन्यथा घायल गौ वंश को गौ सेवा धाम लाकर उसका इलाज किया जाता है।
अपनी जेब खर्च से चला रहे “गौ सेवा धाम”
गौ सेवा धाम से जुड़े युवाओं ने बताया कि इस सेवा कार्य के लिए अब तक उन्होंने केंद्र या राज्य सरकार से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या अनुदान नहीं लिया है। दवाइयों, चारा-पानी, उपचार और अन्य व्यवस्थाओं का पूरा खर्च टीम के सदस्य स्वयं वहन करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका सेवा भाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
30 किलोमीटर तक पहुंचती है सेवा टीम
टीम के युवाओं के अनुसार ग्राम हथनेवरा से लगभग 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में उनकी टीम सक्रिय रूप से गौ सेवा कार्य कर रही है। क्षेत्र में कहीं भी घायल या बीमार गौ वंश दिखाई देने पर सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हो जाती है।
टाटा मोटर्स संचालक का भी मिल रहा सहयोग
ग्राम हथनेवरा चैक पर संचालित टाटा मोटर्स के संचालक द्वारा भी इस सेवा कार्य में सराहनीय सहयोग दिया जा रहा है। घायल गौ वंशों को घटनास्थल से गौ सेवा धाम तक लाने और उपचार के बाद वापस सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए उनके द्वारा चारपहिया वाहन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे युवाओं को सेवा कार्य करने में काफी सुविधा मिलती है।
एक फोन कॉल पर पहुंच जाते हैं “गौ सेवक”
गौ सेवा धाम समिति ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई गौ वंश घायल, बीमार या गंभीर अवस्था में दिखाई दे तो तत्काल मोबाइल नंबर 8109264546 पर सूचना दें, ताकि समय रहते उसकी जान बचाई जा सके। यहां बताना लाजिमी होगा कि जब लोग मुंह मोड़ लेते हैं, तब हथनेवरा के ये युवा किसी फरिश्ते की तरह पहुंच जाते हैं। ग्राम हथनेवरा के युवाओं की यह पहल केवल गौ सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को संवेदनशीलता, करुणा और मानवता का संदेश भी दे रही है। ऐसे युवा आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।





