करही गोलीकांड की Inside Story: दोस्ती, दुश्मनी, रेत कारोबार और “इंस्टा गैंग” का खूनी खेल, बाहर से आए शूटर नहीं… गांव के ही निकले कातिल
पहली नजर में मामला किसी प्रोफेशनल बाहरी गैंग का लग रहा था। CCTV कैमरे टूटे हुए थे, हमलावरों ने चेहरा ढंका हुआ था और वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी। लेकिन एक महीने बाद पुलिस ने जब “ऑपरेशन हंट” के तहत राज खोला, तो कहानी किसी क्राइम वेब सीरीज से कम नहीं निकली।

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा। 23 और 24 अप्रैल 2026 की दरम्यानी रात। बिर्रा थाना क्षेत्र का ग्राम करही गहरी नींद में था। अचानक गोलियों की आवाज गूंजी और कुछ ही मिनटों में पूरा गांव दहशत में जाग उठा। नकाबपोश बदमाश घर में घुसे, सीधे कमरे तक पहुंचे, ताबड़तोड़ फायरिंग की और फिर अंधेरे में गायब हो गए। सुबह होते-होते खबर फैल चुकी थी कि युवा कारोबारी आयुष कश्यप की हत्या हो चुकी है, जबकि उसका छोटा भाई जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। पहली नजर में मामला किसी प्रोफेशनल बाहरी गैंग का लग रहा था। CCTV कैमरे टूटे हुए थे, हमलावरों ने चेहरा ढंका हुआ था और वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी। लेकिन एक महीने बाद पुलिस ने जब “ऑपरेशन हंट” के तहत राज खोला, तो कहानी किसी क्राइम वेब सीरीज से कम नहीं निकली।
करीब एक महीने तक पूरे जांजगीर-चांपा और सक्ती क्षेत्र में दहशत और रहस्य का पर्याय बने करही गोलीकांड का पर्दाफाश होते ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में जिस वारदात को बाहरी शूटरों की प्रोफेशनल सुपारी किलिंग माना जा रहा था, अब उसी मामले में कहानी पूरी तरह पलट गई है। दरअसल, हत्या की पटकथा गांव और आसपास के युवकों ने ही लिखी थी।
वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि लगे कोई बाहरी गैंग आया, हत्या की और फरार हो गया। लेकिन पुलिस की ऑपरेशन हंट जांच ने परत-दर-परत पूरा खेल खोल दिया। शनिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय जांजगीर-चांपा के सभा कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग, जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय और जांजगीर-चांपा की तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुश्री निवेदिता पाल मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ रेत कारोबार, आर्थिक वर्चस्व और व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा से जुड़ी हुई है।
मृतक आयुष कश्यप का क्षेत्र में तेजी से बढ़ता प्रभाव और आर्थिक मजबूती कुछ युवकों को लगातार खटक रही थी।बताया जा रहा है कि आरोपी पक्ष खुद को आर्थिक रूप से पिछड़ता महसूस कर रहा था और इसी कारण धीरे-धीरे मन में द्वेष पनपता गया। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने भी प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि मामला केवल व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं बल्कि, आर्थिक और व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ा हुआ है।
रेत कारोबार और बढ़ता प्रभाव बना दुश्मनी की वजह
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में सबसे बड़ा एंगल सामने आया—रेत कारोबार और आर्थिक प्रतिस्पर्धा। चूंकि, आयुष कश्यप का क्षेत्र में तेजी से बढ़ता प्रभाव कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा था। गांव और आसपास के इलाके में उसका आर्थिक नेटवर्क मजबूत हो रहा था। यही बात आरोपियों के भीतर धीरे-धीरे जलन और प्रतिशोध में बदल गई। पुराने उधारी विवाद पहले से मौजूद थे। ऊपर से व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा ने रिश्तों में जहर घोल दिया। सूत्र बताते हैं कि आरोपियों को लगने लगा था कि यदि आयुष को नहीं रोका गया तो क्षेत्र में उनका प्रभाव खत्म हो जाएगा।
“इंस्टा गैंग” और पुरानी सुपारी की कहानी
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि जांच में एक और सनसनीखेज तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 में आरोपी भूषण बघेल ने कथित रूप से सम्मेलाल नामक व्यक्ति की हत्या के लिए करीब 7 लाख रुपये की सुपारी ली थी। इसी दौरान सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम के जरिए एक छोटा गैंगनुमा नेटवर्क तैयार किया गया। हालांकि, सम्मेलाल बाद में पीछे हट गया और वह घटना अंजाम तक नहीं पहुंची, लेकिन उसी दौरान आपराधिक मानसिकता और नेटवर्क तैयार हो चुका था। उसी दौर में “आयुष को हटाना है” जैसी बातें भी गैंग के भीतर होने लगी थीं। हालांकि, शुरुआत में कुछ लोगों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे रंजिश इतनी गहरी हो गई कि हत्या की साजिश तैयार कर ली गई।
हत्या की रात: पहले कैमरा टूटा, फिर बरसी गोलियां
जांच में सामने आया है कि घटना वाली रात सबसे पहले CCTV कैमरा तोड़ा गया। यह काम किसी अलग व्यक्ति ने किया था, जिसकी तलाश अभी जारी है। इसके बाद आरोपी घर में दाखिल हुए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सबसे पहला फायर अमित टंडन ने किया। कुल तीन राउंड फायरिंग हुई। आरोपियों ने पहले घर के बुजुर्ग सदस्य के कमरे को बाहर से बंद किया, ताकि कोई तत्काल बाहर न निकल सके। इसके बाद सीधे आयुष कश्यप को निशाना बनाया गया। बीच-बचाव में आए छोटे भाई को भी गोली मारी गई। वारदात के बाद आरोपी इस तरह फरार हुए कि लगे कोई बाहरी गिरोह घटना को अंजाम देकर भाग गया हो।
लगभग 200 CCTV फुटेज और सात राज्यों तक जांच
मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने लगभग 200 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले। साइबर टीम लगातार एक्टिव रही। जांच दल तमिलनाडु, गुजरात और उड़ीसा समेत कई राज्यों तक पहुंचा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते-जोड़ते पुलिस स्थानीय आरोपियों तक पहुंची।
पूरे हत्याकांड का मुख्य मास्टरमाइंड अब भी फरार
हालांकि, तीन आरोपियों हेमंत कुमार बघेल (23) वर्ष निवासी – वार्ड नं. 11, करही, थाना बिर्रा, जिला सक्ती, भूषण बघेल (23) निवासी – वार्ड नं. 01, करही, थाना बिर्रा, जिला सक्ती एवं अमित टंडन (28) निवासी – वार्ड नं. 09, करही, थाना बिर्रा, जिला सक्ती (छ.ग.) की गिरफ्तारी हो चुकी है और एक पिस्टल एवं मैगजीन, एक अतिरिक्त खाली मैगजीन तथा घटना में प्रयुक्त बाइक भी बरामद कर ली गई है, लेकिन पुलिस मान रही है कि कहानी अभी पूरी खत्म नहीं हुई है। कुछ संदिग्ध अब भी हिरासत में बताए जा रहे हैं और आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं। वहीं इस पूरे हत्याकांड का मुख्य मास्टरमाइंड अभी गिरफ्त से बाहर है। यही वजह है कि पुलिस लगातार “सुपारी किलिंग एंगल”, आर्थिक लेन-देन और पुराने आपराधिक कनेक्शन खंगाल रही है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
“ऑपरेशन हंट”: जिसने पूरी कहानी पलट दी
गौरतलब है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने गांव पहुंचकर खुद जांच की समीक्षा की। इसके बाद “ऑपरेशन हंट” शुरू किया गया। यही ऑपरेशन केस का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल डेटा, पुराने विवाद, संदिग्धों की गतिविधियां और स्थानीय इनपुट जोड़ते-जोड़ते पुलिस तीन आरोपियों हेमंत कुमार बघेल, भूषण बघेल और अमित टंडन तक पहुंच गई। आरोपियों के कब्जे से कट्टा, मैगजीन और घटना में प्रयुक्त बाइक बरामद की गई है।
गांव में चर्चा: दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर
करही और आसपास के इलाके में अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिन युवकों के बीच कभी उठना-बैठना था, वही आगे चलकर खूनी दुश्मनी में बदल गया। गांव के लोग इसे पैसे, प्रभाव और आपराधिक सोच के खतरनाक मिश्रण का परिणाम मान रहे हैं। फिलहाल, पुलिस की नजर अब उन लोगों पर है, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पूरी साजिश को दिशा दी। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस चर्चित गोलीकांड में कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।





