किताबें बंद, सड़क पर आंदोलन… मालखरौदा में गुरुजी की मांग को लेकर बच्चों ने संभाली कमान
शिक्षकों की कमी से परेशान छात्र उतरे सड़क पर, बोले- भविष्य बचाने निकले हैं, रास्ता रोकना मजबूरी है

मालखरौदा (सक्ती)। आमतौर पर जिन हाथों में किताबें और कलम नजर आती हैं, वही हाथ शुक्रवार को अपनी पढ़ाई का हक मांगने के लिए सड़क पर दिखाई दिए। सक्ती जिले के मालखरौदा में शासकीय हिंदी माध्यम स्कूल के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों की कमी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और एसडीएम कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया।
छात्रों का कहना है कि स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों के कई पद खाली पड़े हैं। विषयवार शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परीक्षा नजदीक होने के बावजूद कक्षाएं नियमित नहीं चल पा रही हैं, जिससे उनका भविष्य दांव पर लग गया है।
“हमारा रास्ता नहीं, हमारी पढ़ाई रुकी है”
प्रदर्शन कर रहे बच्चों ने कहा कि कई बार स्कूल प्रबंधन और अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। मजबूरी में उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। छात्रों ने साफ कहा कि जब तक स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
दरी बिछाकर बैठे छात्र, थम गया यातायात
वीरभाठा-मालखरौदा मुख्य मार्ग पर बड़ी संख्या में छात्र दरी बिछाकर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके के लिए रवाना हुए और छात्रों को समझाने का प्रयास शुरू किया गया।
सवालों के घेरे में शिक्षा व्यवस्था
छात्रों का यह आंदोलन केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी की बड़ी तस्वीर भी सामने ला रहा है। सवाल यह है कि जब बच्चे खुद सड़क पर उतरकर शिक्षक मांगने को मजबूर हो जाएं, तो शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत क्या है?
अब देखना होगा कि प्रशासन छात्रों की मांग पर कितनी जल्दी कदम उठाता है या फिर इन बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए आंदोलन का रास्ता ही अपनाना पड़ेगा।





