सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी क्लिनिक में व्यस्त डॉक्टर, अकलतरा अस्पताल में मरीज परेशान, विवाद के बाद बढ़ा आक्रोश
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉ. श्रीवास अकलतरा में ही “वेदांता क्लिनिक” नाम से निजी अस्पताल संचालित करते हैं और अक्सर सरकारी अस्पताल में अनुपस्थित रहकर निजी क्लिनिक में मरीज देखते हैं। इसका सीधा असर सरकारी अस्पताल आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

NKD@अकलतरा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अकलतरा में पदस्थ शासकीय चिकित्सक डॉ. हरीश श्रीवास एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन पर सरकारी ड्यूटी के दौरान अस्पताल से गायब रहकर निजी क्लिनिक चलाने और मरीजों से अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉ. श्रीवास अकलतरा में ही “वेदांता क्लिनिक” नाम से निजी अस्पताल संचालित करते हैं और अक्सर सरकारी अस्पताल में अनुपस्थित रहकर निजी क्लिनिक में मरीज देखते हैं। इसका सीधा असर सरकारी अस्पताल आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
मंगलवार दोपहर मामला उस समय और गरमा गया जब ग्राम सोरमाल से इलाज कराने पहुंचे ग्रामीणों एवं जनपद पंचायत अकलतरा के सभापति के साथ डॉक्टर की तीखी बहस हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इलाज कराने पहुंचे लोगों से डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा कि “अभी इलाज कराने आने का समय है?” इस बात को लेकर माहौल गरमा गया और अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बन गई।
वहां मौजूद लोगों का आरोप है कि डॉक्टर का व्यवहार लंबे समय से मरीजों और आम नागरिकों के प्रति ठीक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीज सुबह से अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं रहते। कई बार मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ता है।
मामले की जानकारी मिलने पर बीएमओ डॉ. महेंद्र सोनी को फोन कर शिकायत दी गई। बताया जा रहा है कि जब बीएमओ मौके पर पहुंचे तो डॉ. श्रीवास अस्पताल से अनुपस्थित मिले। इसके बाद बीएमओ सोनी ने स्वयं मरीजों का इलाज किया। इस घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जनपद सभापति और डॉक्टर के बीच हुए विवाद का वीडियो भी सामने आने की चर्चा है, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर निजी क्लिनिक को प्राथमिकता देंगे तो गरीब मरीज आखिर कहां जाएंगे।
क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित चिकित्सक पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आम जनता को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।






