आधी रात… घर में फन फैलाए बैठा था कोबरा, फिर बजा एक फोन और पहुंच गया ‘स्नेक मैन अनुराग टिंकू शुक्ला’
विगत 17 साल से मौत और जिंदगी के बीच खड़े होकर इंसानों के साथ बेजुबान सांपों की भी बचा रहे हैं जान

राजेंद्र राठौर@जांजगीर। रात के करीब दो बजे थे। घर के एक कोने में फन फैलाए बैठे कोबरा को देखकर पूरे परिवार की सांसें थम गई थीं। बच्चों की चीख-पुकार, महिलाओं में दहशत और बाहर जुटी भीड़… हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था—”अब क्या होगा?”
इसी बीच किसी ने एक नंबर मिलाया। कुछ ही मिनटों में एक गाड़ी घर के सामने आकर रुकी। हाथ में स्नेक स्टिक लिए एक युवक बिना घबराहट के भीतर दाखिल हुआ। कुछ पल तक उसने सांप की हर हरकत पर नजर रखी और फिर देखते ही देखते उसे सुरक्षित पकड़ लिया। घरवालों ने राहत की सांस ली, जबकि उस जहरीले सांप की भी जान बच गई।

यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि जांजगीर में अक्सर दिखाई देने वाला वास्तविक नजारा है। और इस कहानी का नायक है अनुराग टिंकू शुक्ला, जिन्हें लोग प्यार से “स्नेक मैन” कहते हैं।
बीते 17 वर्षों से अनुराग टिंकू शुक्ला ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इंसानों और सांपों के बीच भरोसे की एक कड़ी बनाने में लगा दिया है। दिन हो या आधी रात, तेज बारिश हो या कड़कड़ाती ठंड—जैसे ही किसी घर, दुकान, खेत या परिसर में सांप निकलने की सूचना मिलती है, वे बिना समय गंवाए मौके के लिए निकल पड़ते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि दो जिंदगियों को बचाने का मिशन होता है।
अनुराग टिंकू शुक्ला बताते हैं कि इस सफर की शुरुआत भी एक ऐसी घटना से हुई, जिसने उनकी सोच बदल दी। करीब 17 वर्ष पहले एक मित्र के घर में कोबरा के कई बच्चे निकल आए थे। लोग डर के कारण उन्हें मारने की तैयारी कर चुके थे। तभी अनुराग टिंकू शुक्ला ने उन्हें सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। उस दिन उन्होंने तय कर लिया कि जब तक संभव होगा, किसी भी सांप को अज्ञानता और डर की वजह से मरने नहीं देंगे।
आज हालात बदल चुके हैं। कभी सांप दिखते ही लाठी उठाने वाले लोग अब सबसे पहले अनुराग टिंकू शुक्ला को फोन करते हैं। वे प्रतिदिन पांच से सात सांपों का निःशुल्क रेस्क्यू करते हैं और उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ आते हैं। उनके साथ जुड़े कई युवा भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
अनुराग टिंकू शुक्ला का कहना है कि सांप दुश्मन नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अधिकांश सांप बिना उकसावे के हमला नहीं करते। इसलिए घबराने या उन्हें मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यूअर को बुलाना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
वे लोगों को एक और महत्वपूर्ण संदेश भी देते हैं। यदि किसी को सांप काट ले तो झाड़-फूंक, टोना-टोटका या अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर उपचार कराना चाहिए। सही समय पर मिला इलाज ही जीवन बचा सकता है।
हर सफल रेस्क्यू के बाद जब एक परिवार राहत की सांस लेता है और एक बेजुबान जीव भी सुरक्षित जंगल की ओर लौट जाता है, तब अनुराग टिंकू शुक्ला की मुस्कान बता देती है कि असली जीत किसी एक की नहीं, बल्कि जीवन की होती है।
जांजगीर में अब लोग कहते हैं—“अगर घर में सांप निकल आए तो डरने की नहीं, बस एक फोन करने की जरूरत है… क्योंकि कहीं न कहीं ‘स्नेक मैन अनुराग टिंकू शुक्ला’ किसी और जिंदगी को बचाने की तैयारी में जरूर होंगे।”



