घुटनों तक कीचड़, कंधों पर शव… जिला मुख्यालय सक्ती से सिर्फ 1 किमी दूर ग्राम सोंठी में विकास की दर्दनाक हकीकत
लगातार हो रही बारिश के बीच तीन जुलाई को गांव में एक महिला का निधन हो गया। परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी की, लेकिन जब शव को श्मशान घाट ले जाने की बारी आई तो सामने एक बड़ी मजबूरी खड़ी थी। श्मशान तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल चुका था। हालात ऐसे थे कि किसी भी चारपहिया वाहन या शव वाहन का वहां तक पहुंचना संभव नहीं था।

शहजाद खान/सक्ती। किसी अपने को खोने का दुख वैसे ही असहनीय होता है, लेकिन जब उस अंतिम विदाई के लिए भी सम्मानजनक रास्ता न मिले, तो यह पीड़ा कई गुना बढ़ जाती है। सक्ती जिले के जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत सोंठी में तीन जुलाई 2026 को ऐसा ही हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने विकास और बुनियादी सुविधाओं के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
लगातार हो रही बारिश के बीच तीन जुलाई को गांव में एक महिला का निधन हो गया। परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी की, लेकिन जब शव को श्मशान घाट ले जाने की बारी आई तो सामने एक बड़ी मजबूरी खड़ी थी। श्मशान तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल चुका था। हालात ऐसे थे कि किसी भी चारपहिया वाहन या शव वाहन का वहां तक पहुंचना संभव नहीं था।
मजबूरन परिजनों और ग्रामीणों ने शव को अपने कंधों पर उठाया और घुटनों तक कीचड़ में धंसते हुए करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलकर श्मशान घाट पहुंचे। बारिश, फिसलन और दलदल के बीच हर कदम भारी था, लेकिन अपनों को अंतिम विदाई देने का कर्तव्य निभाने के लिए ग्रामीणों ने सारी मुश्किलें झेलीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।
बहरहाल, अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए श्मशान घाट तक तत्काल सर्व मौसम पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम विदाई के दौरान इस तरह की अमानवीय और पीड़ादायक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
पूरी घटना के फोटो-वीडियो वायरल
इस पूरी घटना के फोटो और वीडियो अब सामने आए हैं, जो न सिर्फ एक गांव की परेशानी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर भी बयां कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला मुख्यालय सक्ती से इतनी कम दूरी पर बसे गांव में भी यदि श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता उपलब्ध नहीं है, तो दूरदराज के गांवों की स्थिति कैसी होगी।
अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला
ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक जाने वाले मार्ग की खराब स्थिति कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष बारिश के मौसम में यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
किसी को न झेलनी पड़े ऐसी पीड़ा
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए कम से कम सर्व मौसम सड़क का निर्माण होना चाहिए, ताकि किसी भी मौसम में शव वाहन सीधे श्मशान घाट तक पहुंच सके और शोकाकुल परिवारों को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।
योजनाएं अब भी जमीन से कोसों दूर
यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन दावों पर भी सवाल है जिनमें गांव-गांव तक सड़क और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जाती है। जब जिला मुख्यालय से सटे गांव के लोगों को अंतिम यात्रा के लिए भी कीचड़ और दलदल से गुजरना पड़ रहा है, तब यह स्पष्ट संकेत है कि विकास की कई योजनाएं अब भी जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर सकी हैं।






