जब एम्बुलेंस बनी प्रसूति कक्ष: तड़के 4 बजे शुरू हुई जंग, रास्ते में प्रसव पीड़ा बढ़ी तो पुलिस जवानों ने संभाला मोर्चा, डायल 112 की तत्परता से सुरक्षित जन्मी नई जिंदगी
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में डायल 112 की टीम ने घबराने के बजाय धैर्य और मानवता का परिचय दिया। आरक्षक योगेश बंजारे और चालक कमलेश्वर खांडेकर ने स्थिति को संभालते हुए सुरक्षित प्रसव कराने में मदद की। कुछ ही देर में एम्बुलेंस के भीतर नवजात की किलकारी गूंज उठी। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों की हालत सामान्य रही। टीम ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को स्वस्थ बताया।

एनकेडी@पामगढ़। हर दिन डायल 112 की टीम अपराध और आपात स्थितियों से निपटती है, लेकिन इस बार उनकी भूमिका एक नई जिंदगी को सुरक्षित दुनिया में लाने की रही। पामगढ़ ब्लॉक के ग्राम डूडगा में एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश के दौरान ऐसा घटनाक्रम हुआ कि एम्बुलेंस ही प्रसूति कक्ष में बदल गई।

जानकारी के अनुसार, 26 वर्षीय सेवती बाई को तड़के अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल लेकर रवाना हुई। लेकिन रास्ते में ग्राम भदरा के पास प्रसव पीड़ा इतनी तेज हो गई कि अस्पताल पहुंचने का इंतजार संभव नहीं रहा।
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में डायल 112 की टीम ने घबराने के बजाय धैर्य और मानवता का परिचय दिया। आरक्षक योगेश बंजारे और चालक कमलेश्वर खांडेकर ने स्थिति को संभालते हुए सुरक्षित प्रसव कराने में मदद की। कुछ ही देर में एम्बुलेंस के भीतर नवजात की किलकारी गूंज उठी। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों की हालत सामान्य रही। टीम ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को स्वस्थ बताया।
कर्तव्य से बढ़कर निभाई इंसानियत
यह घटना सिर्फ एक सुरक्षित प्रसव की कहानी नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं में तैनात कर्मचारियों की संवेदनशीलता और समर्पण का उदाहरण भी है। जिस वक्त एक परिवार चिंता और घबराहट में था, उस समय डायल 112 की टीम उनके लिए उम्मीद बनकर सामने आई। ग्रामीणों ने भी टीम की तत्परता और मानवीय संवेदना की सराहना करते हुए कहा कि समय पर मिली मदद ने मां और बच्चे दोनों की जिंदगी सुरक्षित कर दी।




