अमर सुल्तानिया-रामसागर बांधा विवाद: 24 घंटे में एफआईआर खारिजी, एएसआई लाइन अटैच और अब सियासी बवाल
कांग्रेस का आरोप है कि आम आदमी की शिकायत दर्ज कराने में पुलिस थानों के चक्कर लगाते-लगाते फरियादियों के “चप्पल घिस जाते हैं”, और रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई महीनों तक नहीं होती। लेकिन इस मामले में प्रभावशाली लोगों के दबाव में महज 24 घंटे के भीतर जांच, निष्कर्ष और कार्रवाई पूरी कर दी गई।
NKD@जांजगीर-चांपा। जिले के नैला चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुड़पार के रामसागर बांधा से मिट्टी उत्खनन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। कारोबारी व भाजपा नेता अमर सुल्तानिया के निर्माणाधीन इथेनॉल प्लांट से जुड़े इस मामले में जहां पुलिस ने काउंटर अपराध को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है, वहीं नैला चौकी में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) कृष्ण कुमार कोशले को रक्षित केंद्र संबद्ध कर दिया गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने पूरी कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
दरअसल, पुलिस के अनुसार ग्राम मुड़पार में व्यवसायी व भाजपा नेता अमर सुल्तानिया द्वारा निर्माणाधीन इथेनॉल प्लांट के लिए रामसागर बांधा तालाब से मिट्टी उत्खनन का कार्य किया जा रहा था। बताया गया कि पंचायत प्रस्ताव पारित होने और सरपंच से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद यह कार्य चल रहा था। इसी बीच गांव के प्रहलाद गिर गोस्वामी एवं अन्य लोगों द्वारा मिट्टी उत्खनन का विरोध किया जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक, 18 मई 2026 की रात लगभग 10 बजे प्रहलाद गिर गोस्वामी एवं अन्य लोगों ने घटनास्थल पहुंचकर मिट्टी उत्खनन कार्य रुकवाया और वहां मौजूद अमर सुल्तानिया के कर्मचारियों लोचन प्रसाद मिरी एवं लोकेश कुमार भैना के साथ हाथ-मुक्का और डंडे से मारपीट की। इस मामले में प्रहलाद गिर गोस्वामी एवं अन्य लोगों के विरुद्ध अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
इसके अगले दिन 19 मई को प्रहलाद गिर गोस्वामी एवं अन्य लोगों ने चौकी नैला पहुंचकर अमर सुल्तानिया एवं उनके गार्ड के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए काउंटर एफआईआर दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी सूचना तत्काल पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कश्यप तथा नगर पुलिस अधीक्षक योगिता बाली खापर्डे को दी गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पूरे मामले की बारीकी से जांच की गई।
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, आसपास के लोगों से पूछताछ की गई तथा वायरल वीडियो फुटेज का परीक्षण किया गया। पुलिस के अनुसार, वीडियो में अमर सुल्तानिया या उनके कर्मचारियों द्वारा किसी प्रकार की मारपीट अथवा गाली-गलौज करना सामने नहीं आया। जांच में यह भी पाया गया कि 18 मई को प्रहलाद गिर गोस्वामी द्वारा चौकी नैला में दिए गए प्रारंभिक आवेदन में केवल मिट्टी उत्खनन, धमकी और विवाद का उल्लेख था, जबकि मारपीट और गाली-गलौज का आरोप बाद में जोड़ा गया।
इसी आधार पर पुलिस ने अमर सुल्तानिया एवं उनके गार्ड के खिलाफ दर्ज अपराध को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा है कि गलत जानकारी देकर झूठा अपराध दर्ज कराने वालों के खिलाफ पृथक से वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश में नैला चौकी में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक कृष्ण कुमार कोशले को तत्काल प्रभाव से रक्षित केंद्र जांजगीर संबद्ध कर दिया गया। आदेश में उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराए बिना मनमाने ढंग से अपराध पंजीबद्ध किया गया, जो संदिग्ध एवं स्वेच्छाचारी आचरण की श्रेणी में आता है। आदेश में थाना जांजगीर में दर्ज अपराध क्रमांक 372/2026 का भी उल्लेख किया गया है।
इधर, इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों में पुलिस कार्रवाई को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि आम आदमी की शिकायत दर्ज कराने में पुलिस थानों के चक्कर लगाते-लगाते फरियादियों के “चप्पल घिस जाते हैं”, और रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई महीनों तक नहीं होती। लेकिन इस मामले में प्रभावशाली लोगों के दबाव में महज 24 घंटे के भीतर जांच, निष्कर्ष और कार्रवाई पूरी कर दी गई।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मामले में जिस तेजी से कार्रवाई की गई, उससे पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि रसूखदार लोगों के सामने नियम-कानून को ताक पर रख दिया गया। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी और कठोर कदम उठाए जाएंगे।
वहीं, पुलिस प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि पूरी कार्रवाई तथ्यों, वीडियो साक्ष्यों और जांच के आधार पर की गई है तथा किसी भी निर्दोष को फंसाया नहीं जाएगा। फिलहाल, यह मामला अब केवल मिट्टी उत्खनन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर जिले में बड़ी बहस का विषय बन चुका है।








