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बलौदा तहसील अंतर्गत ग्राम बिरगहनी में प्रस्तावित हिंद कोल वाशरी विस्तार और 25 मेगावाट प्लांट के खिलाफ ग्रामीण लामबंद, गहरा आक्रोश

कंपनी वर्तमान में संचालित 0.96 एमटीपीए क्षमता की वेट टाइप कोल वाशरी का विस्तार कर इसे 2.4 एमटीपीए तक बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही 25 मेगावाट क्षमता का एएफबीसी पावर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। परियोजना के लिए तीन जून 2026 को सुबह 11 बजे ग्राम बिरगहनी में जनसुनवाई आयोजित की गई है, जहां प्रभावित क्षेत्र के लोगों को अपनी राय और आपत्तियां रखने का अवसर दिया जाएगा।

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। जिले के बलौदा तहसील के अंतर्गत ग्राम बिरगहनी में हिंद मल्टी सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित कोल वाशरी विस्तार एवं 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट को लेकर तीन जून 2026 को आयोजित होने वाली जनसुनवाई से पहले ही क्षेत्र का माहौल गरमा गया है। ग्रामीणों, किसानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में परियोजना को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन और तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, कंपनी वर्तमान में संचालित 0.96 एमटीपीए क्षमता की वेट टाइप कोल वाशरी का विस्तार कर इसे 2.4 एमटीपीए तक बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही 25 मेगावाट क्षमता का एएफबीसी पावर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। परियोजना के लिए तीन जून 2026 को सुबह 11 बजे ग्राम बिरगहनी में जनसुनवाई आयोजित की गई है, जहां प्रभावित क्षेत्र के लोगों को अपनी राय और आपत्तियां रखने का अवसर दिया जाएगा।

हालांकि, जनसुनवाई से पहले ही ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग इस परियोजना के विरोध में खुलकर सामने आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण में भारी वृद्धि होगी। इसके अलावा कोयले और औद्योगिक सामग्री के परिवहन के लिए भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से सड़क सुरक्षा और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना से संबंधित सभी जानकारियां आम लोगों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचाई गई हैं। कई लोगों का कहना है कि पर्यावरण प्रभाव आंकलन (ईआईए) रिपोर्ट की जानकारी अधिकांश प्रभावित परिवारों तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब परियोजना के सभी पहलुओं की जानकारी ही उपलब्ध नहीं कराई गई, तो जनसुनवाई को कितना निष्पक्ष और पारदर्शी माना जा सकता है।

क्षेत्र के किसानों ने भी चिंता जताई है कि यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो कृषि भूमि, जल स्रोतों और पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं। किसानों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य आधार है और किसी भी प्रकार का प्रदूषण सीधे उनकी फसलों तथा उत्पादन को प्रभावित करेगा।

जनसुनवाई को लेकर प्रशासन सतर्क

जनसुनवाई को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन का प्रयास है कि जनसुनवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो तथा सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य, जल संरक्षण और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनका कहना है कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं बल्कि, जनता की वास्तविक राय जानने का मंच होना चाहिए।

जनसुनवाई पर टिकी सबकी निगाहें

अब सभी की निगाहें तीन जून 2026 को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीणों की आपत्तियों और सवालों को किस गंभीरता से सुना जाता है तथा परियोजना के पक्ष और विपक्ष में उठने वाले मुद्दों पर क्या रुख सामने आता है। जनसुनवाई का परिणाम न केवल बिरगहनी बल्कि, पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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