पीपीओ के नाम पर एक लाख रूपए की मांग, पामगढ़ शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, जांच रिपोर्ट पहुंची उच्चाधिकारियों के पास, पहले भी कर्मचारी पर लग चुके हैं गंभीर आरोप
समिति ने शिकायतकर्ता, संबंधित कर्मचारियों एवं अन्य पक्षों के बयान दर्ज कर दस्तावेजों का परीक्षण किया। सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

NKD@जांजगीर-चांपा। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और जीवनभर की जमा-पूंजी पाने की उम्मीद लेकर कार्यालय पहुंचे एक शिक्षक को उस समय बड़ा झटका लगा, जब कथित तौर पर पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी कराने के एवज में एक लाख रुपए की मांग कर दी गई। मामला सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और शिकायत की जांच के लिए तत्काल तीन सदस्यीय जांच दल गठित करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, पूर्व माध्यमिक शाला खोखरी के प्रधान पाठक बृजपाल सिंह चंदेल बीते 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति उपरांत वे अपने पेंशन एवं अन्य देयकों से संबंधित दस्तावेजों को दुरुस्त कराने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पामगढ़ पहुंचे थे। आरोप है कि कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी पुरुषोत्तम यादव ने पेंशन भुगतान आदेश जारी कराने के एवज में एक लाख रुपए की मांग की।
बताया जा रहा है कि राशि की मांग से आहत शिक्षक ने इसका विरोध किया और मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई। शिकायत मिलते ही विभाग हरकत में आया और जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई। जांच दल में पामगढ़ के विकासखंड शिक्षा अधिकारी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुलमुला के प्राचार्य तथा शासकीय हाई स्कूल कुटीघाट के प्राचार्य को शामिल किया गया।
समिति ने शिकायतकर्ता, संबंधित कर्मचारियों एवं अन्य पक्षों के बयान दर्ज कर दस्तावेजों का परीक्षण किया। सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
इससे पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
यह पहला अवसर नहीं है जब संबंधित कर्मचारी विवादों में आया हो। इससे पहले जनपद सदस्य कमला बाई कौशिक ने भी शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी पुरुषोत्तम यादव एवं बाबूलाल पूतेन पर गंभीर आरोप लगाए थे। पत्र में कहा गया था कि सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन फाइलों में नामों की त्रुटियां जानबूझकर बार-बार की जाती हैं और सुधार के नाम पर अनावश्यक परेशान किया जाता है।
क्या पेंशन के लिए भी देनी पड़ेगी कीमत?
मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को अपनी वैधानिक पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने के लिए कथित रूप से रिश्वत मांगने जैसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है? अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।





