Welcome to नवीन कदम डिजिटल   Click to listen highlighted text! Welcome to नवीन कदम डिजिटल
छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपाटॉप न्यूज़राज्यलोकल न्यूज़
Trending

इनसाइड स्टोरी : “CM और मंत्री तक पहुंच” का रौब दिखाने वाले ईई शशांक सिंह को एक वायरल ऑडियो ने पहुंचाया निलंबन तक

मातहत कर्मचारियों पर धौंस, गाली-गलौज और दहशत की चर्चाओं के बीच मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार, जिस सिस्टम को अपनी पकड़ में समझते थे “साहब” उसी ने दिखाई असली हैसियत

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। जल संसाधन विभाग के निलंबित कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह का मामला इन दिनों जांजगीर-चांपा जिले में सबसे ज्यादा चर्चित प्रशासनिक घटनाओं में शामिल हो गया है। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक ऑडियो ने न केवल विभागीय गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि वर्षों से “रौबदार अफसर” की छवि बनाकर रखने वाले अधिकारी की पूरी कार्यशैली को भी कठघरे में ला खड़ा किया।

जांजगीर-चांपा जिले में लंबे समय से यह चर्चा आम थी कि शशांक सिंह स्वयं को प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी का करीबी बताते हुए विभागीय कर्मचारियों पर दबाव बनाते थे। विभाग के भीतर उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बताई जाती रही, जिनके सामने मातहत कर्मचारी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।

“साहब नाराज़ हो गए तो बेइज्जती तय”

विभागीय सूत्र बताते हैं कि जांजगीर-चांपा जिले में इंजीनियर से लेकर एसडीओ और फिर कार्यपालन अभियंता तक का सफर तय करने वाले शशांक सिंह की कार्यशैली हमेशा चर्चा में रही। कर्मचारियों के मुताबिक कार्यालय में ऐसा माहौल बना रहता था कि छोटी सी गलती पर भी किसी कर्मचारी की सार्वजनिक फटकार लग सकती थी। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे हमेशा दहशत में रहते थे। उन्हें डर रहता था कि यदि किसी बात पर साहब नाराज़ हो गए तो कार्यालय में उनकी बेइज्जती होना तय है। यही वजह रही कि वर्षों तक कई अधिकारी और कर्मचारी कथित तौर पर अपमान सहते रहे, लेकिन किसी ने खुलकर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं की।

एक वायरल ऑडियो और बदल गया पूरा खेल

बताया जाता है कि वाहन चालक शशिकांत साहू के साथ फोन पर हुई कथित बदसलूकी भी शायद पहले की घटनाओं की तरह दब जाती, यदि उसका ऑडियो सोशल मीडिया तक नहीं पहुंचता। ऑडियो वायरल होते ही मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।ऑडियो में कथित तौर पर जिस तरह की भाषा और लहजा सुनाई दिया, उसने लोगों को चौंका दिया। मामला मीडिया तक पहुंचा और फिर धीरे-धीरे प्रशासनिक हलकों में भी इसकी गंभीरता महसूस की जाने लगी। यही वह मोड़ था जहां से कहानी बदल गई। जिस मीडिया को कथित तौर पर “पहुंच” के आगे महत्वहीन समझा जाता था, वही मीडिया इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मंच बन गया। वायरल ऑडियो, लगातार खबरें और जनचर्चा ने आखिरकार प्रशासन और शासन दोनों को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।

“चींटी बनाम हाथी” जैसी चर्चा

समूचे प्रदेश में अब इस पूरे घटनाक्रम की तुलना “चींटी और हाथी” की कहावत से की जा रही है। लोग कह रहे हैं कि एक छोटे कर्मचारी ने हिम्मत दिखाई और मामला मीडिया तक पहुंचा, जिसके बाद हालात बदल गए। जो अधिकारी खुद को बेहद प्रभावशाली मानते थे, उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि एक वायरल ऑडियो उनके पूरे करियर पर इतना भारी पड़ जाएगा। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि कार्रवाई रुकवाने के लिए काफी कोशिशें हुईं, लेकिन मामला इतना तूल पकड़ चुका था कि आखिरकार शासन को सख्त कदम उठाना पड़ा।

कलेक्टर जांच के बाद शासन की बड़ी कार्रवाई

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी से जांच कराई। जांच प्रतिवेदन में अधीनस्थ कर्मचारी से अभद्र व्यवहार, वरिष्ठ अधिकारियों पर अशोभनीय टिप्पणी और प्रशासनिक गरिमा धूमिल होने जैसी बातें सामने आने के बाद शासन ने कार्रवाई की। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग ने 16 मई 2026 को शशांक सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रमुख अभियंता कार्यालय, शिवनाथ भवन, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है।

मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में मीडिया की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। लोग कह रहे हैं कि यदि मामला सामने नहीं आता और लगातार खबरें प्रकाशित नहीं होतीं, तो शायद यह प्रकरण भी दबकर रह जाता। कई लोगों का मानना है कि मीडिया आज भी उन लोगों की आवाज बन सकता है, जो सिस्टम के दबाव में खुलकर सामने नहीं आ पाते। इस मामले में भी एक वाहन चालक से शुरू हुई कहानी अब पूरे प्रशासनिक तंत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!