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भृत्य तो सिर्फ मोहरा… आखिर किस अफसर के आदेश पर खुला जिला पंचायत का डीपीआरसी भवन!

डीपीआरसी भवन की चाबी किसके दबाव में दी गई?, जिला पंचायत के दो भृत्यों को नोटिस, अब “असल जिम्मेदार” की तलाश तेज

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। जिला पंचायत परिसर स्थित डीपीआरसी भवन का कथित रूप से लोगों को बंद रखने और मारपीट जैसी गंभीर घटना में इस्तेमाल किए जाने के मामले ने अब प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। मामले में जिला पंचायत प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए दो भृत्यों को नोटिस जारी किया है।

जिला पंचायत के सूत्रों के अनुसार, दोनों कर्मचारियों से यह पूछा गया है कि आखिर किस आधार पर बाहरी लोगों को शासकीय भवन की चाबी उपलब्ध कराई गई। नोटिस में उनसे निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

सबसे बड़ा सवाल-चाबी देने के पीछे कौन?

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर भृत्यों ने किसके कहने पर सरकारी भवन की चाबी उपलब्ध कराई। क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या अधिकारी का दबाव था? यदि था, तो वह कौन था, जिसने अधिकारपूर्वक भवन का उपयोग कराने के निर्देश दिए? इसी बिंदु को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक वर्गों का कहना है कि केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, बल्कि उस असल जिम्मेदार तक पहुंचना जरूरी है, जिसके इशारे पर पूरा घटनाक्रम हुआ।

सरकारी भवन के दुरुपयोग पर बढ़ा आक्रोश

मामले ने शासकीय परिसरों की सुरक्षा और उपयोग व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी सरकारी भवन का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को बंद रखने और प्रताड़ित करने जैसी गतिविधियों के लिए हो सकता है, तो यह प्रशासनिक निगरानी की बड़ी विफलता है। घटना के बाद अब यह मांग भी उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिस किसी की भी भूमिका सामने आए, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

पुलिस और प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल, मामले में पुलिस जांच जारी है, वहीं जिला पंचायत प्रशासन भी आंतरिक स्तर पर तथ्यों को खंगालने में जुटा हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल नोटिस तक सीमित रहती है या फिर इस मामले के पीछे मौजूद कथित प्रभावशाली चेहरों तक भी कार्रवाई पहुंचती है।

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