कांग्रेस के ब्लॉक उपाध्यक्ष अंगदेव यादव पर दुष्कर्म के आरोप से सियासी भूचाल, हाल ही में मिली संगठनात्मक जिम्मेदारी, अब गंभीर आपराधिक आरोपों के घेरे में नेता
आदिवासी महिला की शिकायत पर चंद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज, लेकिन आरोपी तक अब भी नहीं पहुंची है पुलिस

NKD@डभरा (सक्ती)। छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में हाल ही में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी डभरा के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किए गए अंगदेव यादव अब एक गंभीर आपराधिक मामले को लेकर सुर्खियों में हैं।
एक ओर जहां कुछ सप्ताह पहले प्रकाशित समाचारों में उन्हें सक्रिय कार्यकर्ता बताते हुए पार्टी संगठन ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी, वहीं दूसरी ओर अब उन्हीं अंगदेव यादव के खिलाफ चंद्रपुर थाने में छेड़छाड़ और जबरन दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, एक महिला ने चंद्रपुर थाना पहुंचकर अंगदेव यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
एससी-एसटी एक्ट के तहत भी दर्ज हुआ मामला
चंद्रपुर थाना में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग से संबंधित है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी अंगदेव यादव के खिलाफ दुष्कर्म, छेड़छाड़, जान से मारने की धमकी सहित अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत भी अपराध दर्ज किया है।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी ने खेत में ले जाकर जबरन दुष्कर्म किया तथा घटना की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी भी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पदभार ग्रहण से लेकर विवादों तक का सफर
13 अप्रैल 2026 को प्रकाशित समाचारों के अनुसार, कांग्रेस संगठन ने अंगदेव यादव को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी डभरा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। संगठन ने उनकी सक्रियता और राजनीतिक योगदान को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
लेकिन अब उसी नियुक्ति पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पदाधिकारी के खिलाफ पार्टी कोई नैतिक या संगठनात्मक कार्रवाई करेगी?
जनता पूछ रही-आखिर कार्रवाई में देरी क्यों?
क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आदिवासी महिला से जुड़े गंभीर अपराध में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तब आरोपी तक पुलिस की पहुंच क्यों नहीं बन पाई है? आम नागरिकों के मामलों में जहां तत्काल कार्रवाई देखने को मिलती है, वहीं इस मामले में हो रही देरी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप गंभीर हैं तो निष्पक्ष और त्वरित जांच जरूरी है, ताकि सच जल्द सामने आ सके। वहीं कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या राजनीतिक प्रभाव जांच की गति को प्रभावित कर रहा है या पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है?
कांग्रेस संगठन की चुप्पी पर भी उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या कांग्रेस संगठन अपने पदाधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों पर कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगा। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर हमलावर होने की तैयारी में हैं।
हालांकि, कानूनी दृष्टि से यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि एफआईआर दर्ज होना आरोपों की शुरुआत है। किसी भी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने तक दोषी नहीं माना जाता। मामले की सच्चाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।





