बोर्ड परीक्षा परिणामों पर भड़के कलेक्टर, प्राचार्यों को दो टूक – शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं
कलेक्टर ने कहा कि जिले की शिक्षा व्यवस्था सुधारना केवल विभागीय औपचारिकता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी और शिक्षक गंभीरता से काम नहीं करेंगे तो परिणाम भी सामने आएंगे और कार्रवाई भी

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। जिले के बोर्ड परीक्षा परिणामों की समीक्षा बैठक में उस समय माहौल पूरी तरह गंभीर हो गया, जब कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने लगातार गिरते परीक्षा परिणामों और राज्य स्तर पर जिले की कमजोर रैंकिंग पर कड़ी नाराजगी जताई। कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों को कलेक्टर ने सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया। उन्होंने विगत तीन वर्षों के बोर्ड परीक्षा परिणामों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले विद्यालयों के प्राचार्यों से कारण पूछा। कई स्कूलों के खराब रिजल्ट पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने दो टूक कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर अपराध की तरह मानी जाएगी। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी, बीईओ और अन्य अधिकारियों को स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिक्षकों की उपस्थिति, समय पर पढ़ाई और कोर्स पूर्ण कराने की सख्त मॉनिटरिंग होनी चाहिए। बिना कारण अनुपस्थित रहने वाले अथवा समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं करने वाले शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
बैठक में डीईओ अशोक सिन्हा को प्रत्येक शिक्षक का विस्तृत शैक्षणिक डाटा तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसमें शिक्षक द्वारा पूर्ण कराया गया कोर्स, विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम, टेस्ट व्यवस्था और शैक्षणिक प्रगति जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अब शिक्षकों की कार्यप्रणाली का लगातार मूल्यांकन होगा और उसी आधार पर जवाबदेही तय की जाएगी।
विद्यार्थियों के कमजोर विषयों पर भी विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने प्रत्येक छात्र का विषयवार प्रगति चार्ट तैयार करने को कहा, ताकि कमजोर छात्रों की पहचान कर अतिरिक्त कक्षाएं और विशेष अभ्यास कराया जा सके।
पूरक परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए अलग तैयारी योजना बनाने और विशेष मार्गदर्शन देने के निर्देश भी दिए गए। बैठक के अंत में कलेक्टर ने कहा कि जिले की शिक्षा व्यवस्था सुधारना केवल विभागीय औपचारिकता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी और शिक्षक गंभीरता से काम नहीं करेंगे तो परिणाम भी सामने आएंगे और कार्रवाई भी।




