34 लाख के भरोसे थमा डोंगाकोहरौद का आंदोलन, प्रशासन के लिखित वादे पर खुला जाम
सड़क मरम्मत, टेंडर और भारी वाहनों पर प्रतिबंध समेत चार बड़े आश्वासनों के बाद ग्रामीणों ने खत्म किया धरना और आमरण अनशन

जांजगीर-चांपा। पामगढ़ विकासखंड के डोंगाकोहरौद गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर 5 दिनों से चल रहा आंदोलन आखिरकार जिला प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे ग्रामीणों ने बिलासपुर–शिवरीनारायण मार्ग पर चक्काजाम कर दिया था। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की बड़ी संख्या सड़क पर बैठ गई, जिससे मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। कई दौर की बातचीत के बाद प्रशासन ने लिखित में चार अहम आश्वासन दिए, जिसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम, धरना और आमरण अनशन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि पामगढ़ नगर पंचायत से डोंगाकोहरौद होते हुए लाहौद तक करीब 30 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण वर्ष 2017-18 में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित था। भूमि अधिग्रहण और मुआवजा विवाद न्यायालय पहुंचने के कारण परियोजना वर्षों से अधूरी पड़ी है। सड़क की बदहाल स्थिति से रोजाना आवागमन मुश्किल हो गया है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
इसी मांग को लेकर 30 जून से ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठे थे। आंदोलन के दौरान कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद, ग्रामीण सड़क निर्माण को लेकर ठोस पहल होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े रहे।
प्रशासन ने दिए चार बड़े लिखित आश्वासन
लंबी वार्ता के बाद जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन सौंपा। इसके तहत—
1️⃣ लोक निर्माण विभाग ग्रामीणों के समन्वय से सड़क मरम्मत का कार्य शीघ्र शुरू करेगा, जिसके लिए 34 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
2️⃣ सड़क निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी।
3️⃣ सड़क की जद में आने वाले 21 खातेदारों की भूमि त्याग की प्रक्रिया स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के सहयोग से पूरी कराई जाएगी।
4️⃣ मार्ग पर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक भारी मालवाहक वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
वादों पर रहेगी ग्रामीणों की नजर
लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने धरना, चक्काजाम और आमरण अनशन समाप्त कर दिया, जिससे बिलासपुर–शिवरीनारायण मार्ग पर यातायात फिर से सामान्य हो गया। हालांकि, ग्रामीणों ने साफ किया कि अब उनकी नजर प्रशासन के वादों के क्रियान्वयन पर रहेगी। यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में आंदोलन फिर शुरू करने का निर्णय लिया जा सकता






