मेड़ पर लगाए कुछ पौधे, बदल गई किस्मत: अनानास की खेती से हर साल 2.5 लाख की अतिरिक्त कमाई, जानिए… प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ के सफलता की कहानी
कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के दम पर उनका छोटा-सा प्रयोग आज दो एकड़ में फैले सफल अनानास बगीचे में बदल चुका है। उनके खेत में आम और अमरूद के साथ अनानास की बहुफसली खेती किसानों के लिए एक सफल मॉडल बन गई है।

रायगढ़। कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने आज एक किसान की तकदीर बदल दी। रायगढ़ जिले के सकरबोगा पंचायत अंतर्गत ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ ने अनानास की खेती को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। आज वे दो एकड़ में अनानास की खेती कर हर साल 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
शौक ने दिलाई नई पहचान
अरुण सॉ पहले धान जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। वर्षों पहले उन्होंने घर के उपयोग के लिए खेत की मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए थे। पौधों की अच्छी बढ़वार और बेहतरीन गुणवत्ता वाले फलों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपना शुरू किया और धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाते गए।
कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के दम पर उनका छोटा-सा प्रयोग आज दो एकड़ में फैले सफल अनानास बगीचे में बदल चुका है। उनके खेत में आम और अमरूद के साथ अनानास की बहुफसली खेती किसानों के लिए एक सफल मॉडल बन गई है।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा
अनानास की खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत है। इसमें सिंचाई, खाद और कीटनाशकों की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है, जिससे उत्पादन खर्च कम रहता है। वहीं बाजार में इसकी लगातार मांग बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार होने वाला प्रत्येक अनानास 40 से 80 रुपये तक में बिकता है, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिलता है।
पौधों से भी हो रही अतिरिक्त कमाई
फलों की बिक्री के अलावा अनानास के पौधों से निकलने वाले प्ररोह (सकर) भी उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुके हैं। किसान इन प्ररोहों को खरीदकर अपने खेतों में अनानास की खेती शुरू कर रहे हैं। इससे अरुण सॉ की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र में उद्यानिकी और कृषि विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
अरुण सॉ का कहना है कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही फसल का चयन, नई तकनीकों का उपयोग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर अमल करने से मिलती है। उनका मानना है कि स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती की जाए तो सीमित जमीन और संसाधनों में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।
अरुण सॉ की यह सफलता साबित करती है कि खेती में छोटे-छोटे प्रयोग भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। खेत की मेड़ पर शुरू हुआ उनका सफर आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है।






