Akaltara: जांच अधिकारी की जगह ‘सेटिंग मैनेजर’ बन गए बाबू, ग्राम पंचायत तिलई में प्रधानमंत्री आवास की शिकायत दबाने और मामला रफा-दफा कराने की चर्चाएं तेज
ग्रामीणों का आरोप है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के बजाय संबंधित कर्मचारी शिकायतकर्ताओं और आरोपित पक्ष के बीच "सेटिंग" कराने में अधिक रुचि दिखा रहा है। इसके चलते पूरे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-अकलतरा। ग्राम पंचायत तिलई में प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए जनपद पंचायत अकलतरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा एक क्लर्क को जांच की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के बजाय संबंधित कर्मचारी शिकायतकर्ताओं और आरोपित पक्ष के बीच “सेटिंग” कराने में अधिक रुचि दिखा रहा है। इसके चलते पूरे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायतें लाखों रुपये की योजनाओं और शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़ी हों, तब जांच ऐसे अधिकारी से कराई जानी चाहिए, जिसके पास स्वतंत्र निर्णय लेने और तथ्यात्मक परीक्षण करने का अधिकार हो। आरोप है कि जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने और शिकायतों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह केवल ग्राम पंचायत तिलई तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि जनपद पंचायत स्तर पर जांच प्रणाली की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच टीम वास्तविक तथ्यों को सामने लाती है या फिर मामला कागजी कार्रवाई तक सिमटकर रह जाता है।





