Reunion: किसी के सिर पर जिम्मेदारियां, किसी के बालों में सफेदी… लेकिन दोस्ती आज भी वैसी ही; 1996 बैच का स्नेह मिलन बना भावनाओं का संगम
शिवरीनारायण में तीन दशक बाद मिले सहपाठियों ने एक-दूसरे को देखा तो कई चेहरों को पहचानने में पलभर लगा, लेकिन पहचान होते ही गले मिलकर भावुक हो उठे। किसी ने अपने पुराने दोस्त को देखकर कहा, "तू बिल्कुल नहीं बदला", तो किसी ने हंसते हुए स्कूल की शरारतों का जिक्र छेड़ दिया। कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा मानो सभी फिर से स्कूल के उसी प्रांगण में लौट गए हों।

जांजगीर-शिवरीनारायण। समय बदल गया, चेहरे बदल गए, जिम्मेदारियां बढ़ गईं, लेकिन दोस्ती का रंग नहीं बदला। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवरीनारायण के वर्ष 1996 बैच के पूर्व विद्यार्थी जब लगभग 30 साल बाद एक ही छत के नीचे मिले तो मानो समय का पहिया पीछे घूम गया। होटल ध्रुव तारा में आयोजित स्नेह मिलन समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन सुनहरे दिनों की वापसी थी, जिन्हें सभी ने अपने दिलों में संजोकर रखा था।
तीन दशक बाद मिले सहपाठियों ने एक-दूसरे को देखा तो कई चेहरों को पहचानने में पलभर लगा, लेकिन पहचान होते ही गले मिलकर भावुक हो उठे। किसी ने अपने पुराने दोस्त को देखकर कहा, “तू बिल्कुल नहीं बदला”, तो किसी ने हंसते हुए स्कूल की शरारतों का जिक्र छेड़ दिया। कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा मानो सभी फिर से स्कूल के उसी प्रांगण में लौट गए हों।
परिचय सत्र के दौरान हर साथी ने अपने जीवन के सफर की कहानी साझा की। कोई प्रशासनिक सेवा में पहुंचा, कोई व्यवसाय में सफल हुआ, तो किसी ने शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उपलब्धियों के बीच संघर्षों की कहानियां भी सामने आईं, जिन्हें सुनकर कई आंखें नम हो गईं।
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब तत्कालीन प्राचार्य पीएल कौशिक, सेवानिवृत्त शिक्षक उदयराम कैवर्त और प्राचार्य आरपी कश्यप का सम्मान किया गया। शाल, श्रीफल और भगवान शिवरीनारायण का छायाचित्र भेंट करते समय कई पूर्व विद्यार्थियों ने स्वीकार किया कि जीवन में जो भी मुकाम हासिल हुआ है, उसकी नींव इन्हीं गुरुजनों ने रखी थी।
पुरानी तस्वीरों के एलबम खुले तो यादों का सिलसिला भी खुल गया। कक्षा में की गई शरारतें, खेलकूद प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और परीक्षा के दिनों की बातें चर्चा का केंद्र रहीं। हंसी-मजाक के बीच कई बार भावनाएं भी उमड़ पड़ीं।
सहपाठियों ने तय किया कि यह मिलन केवल एक दिन की मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी नियमित रूप से ऐसे आयोजन कर आपसी रिश्तों और सहयोग को मजबूत किया जाएगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, समूह चर्चा और सामूहिक भोज ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
समारोह के बाद सभी साथियों ने मठ मंदिर पहुंचकर भगवान शिवरीनारायण के दर्शन किए। विदाई के समय चेहरों पर मुस्कान थी, लेकिन आंखों में फिर मिलने का वादा भी। 30 साल बाद हुआ यह मिलन सभी के लिए एक ऐसी याद बन गया, जो उम्रभर उनके दिलों में जीवित रहेगी।
कार्यक्रम में भूपेंद्र चंद्रा, पवन केसरवानी, भरत सिंह, अमित पारीक, रवि नारायण शर्मा, मदन तिवारी, नवीन शर्मा, खिलावन आदित्य, भगवान केसरवानी, देवेंद्र केसरवानी, बलराम पटेल, योगेश भट्ट, सीताराम चंद्रा, योगेश रजक, मिलेंद्र केसरवानी, विष्णु केसरवानी, प्रतिभा शर्मा, मोना सोनी, रश्मि यादव, कस्तूरी वैष्णव, शैलजा लाल, अर्चना केसरवानी, आशा अग्रवाल, मेघा गोयल, दीप्ति शुक्ला, गौरी तैलंग, बद्रिका यादव शामिल हुए।







