एक फैसले ने बदल दी पहचान: जिस बेटी ने आत्मसम्मान के लिए लौटा दी बारात, वही अब टूटते रिश्तों को संभालने और महिलाओं को न्याय दिलाने में निभाएगी अहम भूमिका
सिंदूर रस्म के दौरान दूल्हे को नशे की हालत में देखकर लिया था साहसिक फैसला, सामाजिक दबाव के आगे नहीं झुकी युवती; पुलिस अधीक्षक ने सम्मानित कर परिवार परामर्श केंद्र में महिला काउंसलर की सौंपी जिम्मेदारी

जांजगीर-चांपा। कहा जाता है कि शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का रिश्ता होती है। लेकिन जब रिश्ते की नींव ही नशे और गैर-जिम्मेदारी पर रखी जाए, तो उसे स्वीकार करने से बेहतर है साहस के साथ उसका विरोध करना। ऐसा ही साहस दिखाया ग्राम कोसमंदा की बेटी मुस्कान प्रधान पिता स्व. तुलाराम प्रधान ने, जिसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए नशे में धुत दूल्हे के साथ शादी करने से साफ इंकार कर दिया।

दरअसल, एक दिन पहले कोसमंदा में विवाह समारोह के दौरान ग्राम खोखरा निवासी दूल्हा संतकुमार राय पिता मनहरण लाल राय बारात लेकर पहुंचा था। विवाह की रस्में चल रही थीं, लेकिन सिंदूरदान के समय जब दूल्हे की हालत शराब के नशे में धुत दिखाई दी, तब मुस्कान ने अपने आत्मसम्मान और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए शादी से इंकार कर दिया। देखते ही देखते पूरा विवाह समारोह चर्चा का विषय बन गया और बारात को वापस लौटना पड़ा।
उस समय कई लोगों ने इसे एक साहसी निर्णय बताया, लेकिन शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह फैसला समाज में इतना बड़ा संदेश बन जाएगा। मुस्कान के इस कदम ने हजारों युवतियों को यह भरोसा दिया कि जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में आत्मसम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए।
मुस्कान के इसी साहस और सामाजिक जागरूकता को सम्मान देते हुए जांजगीर-चांपा पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (आईपीएस) ने उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सम्मानित किया। इतना ही नहीं, समाज में महिलाओं की आवाज को मजबूती देने और पारिवारिक विवादों के समाधान में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें परिवार परामर्श केंद्र, जांजगीर में महिला काउंसलर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
सम्मान समारोह में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप, सीएसपी योगिताबाली खापर्डे, डीएसपी सतरूपा तारम, चांपा थाना प्रभारी निरीक्षक अशोक वैष्णव सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि मुस्कान का निर्णय केवल एक विवाह से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह नशामुक्त समाज और महिला आत्मसम्मान की दिशा में एक मजबूत संदेश है। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और गलत को गलत कहने का साहस रखती हैं।
मुस्कान प्रधान की कहानी अब केवल एक गांव या जिले की कहानी नहीं रह गई है। यह उस नई सोच की पहचान बन गई है, जिसमें बेटियां समझौते नहीं, बल्कि सम्मान और समानता के साथ जीवन जीने का अधिकार चुन रही हैं। नशे के खिलाफ उनकी यह “ना” समाज के लिए एक ऐसी मिसाल बन गई है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।




