CAC नियुक्ति पर उठे सवाल: मिडिल स्कूल के दावेदारों को दरकिनार कर प्राथमिक शिक्षक को मिली जिम्मेदारी
कोटमी सोनार संकुल में शैक्षिक समन्वयक नियुक्ति को लेकर शिक्षकों में नाराजगी, नियमों के उल्लंघन का आरोप

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत कोटमी सोनार संकुल में शैक्षिक समन्वयक (CAC) की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समग्र शिक्षा कार्यालय द्वारा जारी आदेश में प्राथमिक शाला के शिक्षक अश्वनी कुमार पटेल को संकुल शैक्षिक समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि संबंधित संकुल में माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल) के वरिष्ठ शिक्षक एवं प्रधान पाठक भी इस पद के लिए दावेदार थे।
जानकारी के अनुसार, कोटमी सोनार संकुल में मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक संजीव सिंह तथा शिक्षक मनेंद्र मिरी ने भी शैक्षिक समन्वयक पद के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। दोनों शिक्षकों का दावा है कि वे शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनुभव के आधार पर इस जिम्मेदारी के लिए पात्र थे, लेकिन उनकी अनदेखी करते हुए प्राथमिक शाला के शिक्षक अश्वनी पटेल की नियुक्ति कर दी गई। आरोप है कि शैक्षिक समन्वयक का कार्य प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी, मार्गदर्शन और समन्वय से जुड़ा होता है।
ऐसे में मिडिल स्कूल स्तर के अनुभवी शिक्षकों की उपेक्षा कर प्राथमिक शिक्षक को नियुक्त करना नियमों और प्रक्रिया की भावना के विपरीत माना जा रहा है। दरअसल, 26 मई 2026 को जारी आदेश में कोटमी सोनार संकुल के लिए अश्वनी कुमार पटेल, जो शासकीय प्राथमिक शाला भाठापारा कोटमी सोनार में पदस्थ हैं, को संकुल शैक्षिक समन्वयक का दायित्व सौंपा गया है।
आदेश में यह भी उल्लेख है कि विभिन्न कारणों से रिक्त हुए पदों को भरने के लिए यह व्यवस्था की गई है। नियुक्ति के बाद शिक्षा विभाग के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि चयन प्रक्रिया में पात्रता और वरिष्ठता को कितना महत्व दिया गया। शिक्षकों का कहना है कि यदि मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक और शिक्षक ने आवेदन किया था तो उनके आवेदन पर क्या विचार किया गया और चयन के लिए कौन-से मानदंड अपनाए गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अब इस मामले में संबंधित शिक्षकों द्वारा उच्च अधिकारियों के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। यदि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो यह मामला शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक विवाद बन सकता है। बहरहाल, समग्र शिक्षा के तहत संकुल शैक्षिक समन्वयक की नियुक्तियां शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में कोटमी सोनार की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।






